बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

वंदे मातरम् और सरल हिंदी भावार्थ

वंदे मातरम् और सरल हिंदी भावार्थ 












प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


वंदे मातरम् !
********
वंदे मातरम् !
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम् !
शुभ्र ज्योत्स्ना-पुलकित यामिनीम्
फुलकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् 
सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम् 
सुखदां, वरदां मातरम् ! 

वंदे मातरम् ! 
सप्तकोटीकंठ-कलकल निनादकराले, 
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केणो मां तुमि एतो बले !
बहुबलधारिणीम् नमामि तारिणीम् 
रिपुदलवारिणीम् मातरम् !

वंदे मातरम् !
तुमि विद्या, तुमि धर्म, 
तुमि हरी, तुमि कर्म, 
तवं ही प्राणः शरीरे !
बाहुते तुमि मां शक्ति, 
हृदये तुमि मां भक्ति, 
तोमारई प्रतिमा गड़ी मंदिरे-मंदिरे !
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणीं,
कमला कमल - दल- विहारिणीं !
वाणी विद्यादायिनीं नमामि त्वं, 
नमामि कमलां, अमलां, अतुलाम् !
सुजलां, सुफलां, मातरम् !

वंदे मातरम् !
श्यामलां, सरलां, सुस्मितां, भूषिताम् !
धरणी, भरणी मातरम् !

वंदे मातरम् !

सौजन्य - आनंदमठ, बंकिमचंद्र चटर्जी 

सरल हिंदी भावार्थ
************
हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम जल से परिपूर्ण हो, फल-फूल और अन्न से समृद्ध हो।
तुम्हारी हवा मलय पर्वत की शीतल सुगंध से भरी हुई है।
तुम खेतों की हरियाली से ढकी हुई हो।
चाँदनी रातें तुम्हारे सौंदर्य को और बढ़ाती हैं।
तुम्हारे वृक्ष फूलों से लदे हैं और पत्तियाँ शोभायमान हैं।
तुम सदा मुस्कुराने वाली हो, मधुर भाषा बोलने वाली हो।
तुम सुख देने वाली और वरदान देने वाली हो।
हे माता! मैं तुम्हें वंदन करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम्हारे करोड़ों पुत्रों के कंठ से उठने वाला स्वर बहुत शक्तिशाली है।
तुम्हारे करोड़ों हाथों में शस्त्रों जैसी शक्ति है।
तुम देखने में कोमल लगती हो, फिर भी तुममें अपार बल है।
तुम अनेक शक्तियों से युक्त हो।
मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ, क्योंकि तुम संकटों से तारने वाली हो।
तुम शत्रुओं का नाश करने वाली हो।
हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो।
तुम ही हरि (ईश्वर) हो और तुम ही कर्म हो।
तुम ही शरीर में प्राण रूप में विद्यमान हो।

तुम्हारे बाहुओं में शक्ति है और हृदय में भक्ति है।
हर मंदिर में तुम्हारी ही प्रतिमा स्थापित है।

तुम दुर्गा के रूप में हो, जो दस हथियारों को धारण करती हैं।
तुम लक्ष्मी के रूप में हो, जो कमल पर विराजमान रहती हैं।
तुम सरस्वती के रूप में हो, जो ज्ञान देने वाली हैं।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम कमल के समान पवित्र हो, निर्मल हो और अतुलनीय हो।
हे जल और अन्न से परिपूर्ण माता! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ। 

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम हरियाली से युक्त हो, सरल और सहज स्वभाव वाली हो।
तुम सदा मुस्कुराने वाली और आभूषणों से सुशोभित हो।
तुम धरती हो और पालन करने वाली माता हो।
मैं तुम्हें बार-बार प्रणाम करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
मैं तुम्हें नमन करता हूँ, वंदन करता हूँ, और श्रद्धा से प्रणाम करता हूँ।

धन्यवाद, 
केशव राम सिंघल