मंगलवार, 15 सितंबर 2026

बाल नाटक - भारत की भाषाएँ

बाल नाटक - भारत की भाषाएँ 

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अवधि - 12–15 मिनट 

रचनाकार - केशव राम सिंघल

मंच - मंच पर सामने भारत का मानचित्र। सामने बोर्ड पर लिखा हो — भाषा वाटिका। प्रत्येक बाल-कलाकार के गले में अपनी भाषा का पट्टा।

पात्र - हिंदी (सूत्रधार) · तमिल · गुजराती · बंगाली · मराठी · असमिया · ओड़िया · कश्मीरी · भोजपुरी · राजस्थानी · पंजाबी · उर्दू · संस्कृत

 दृश्य 1 · भाषा वाटिका में

(धीमी रोशनी। हिंदी तिरंगा लेकर दर्शकों की ओर मुड़ती है।)


हिंदी - नमस्ते बच्चों! नमस्ते अतिथियों और गुरुजनों! मैं हिंदी हूँ — किताबों की भाषा, गीतों की भाषा। आज मेरी वाटिका में बहुत सी बहनें आने वाली हैं। हमारी अपनी बहनें — भारत की भाषाएँ!


(तमिल हाथ जोड़कर, मल्लिका सजाए, धीरे नाचते हुए आती है।)

तमिल - वणक्कम्! मैं तमिल हूँ। द्रविड़ भाषाओं की बड़ी बहन। मेरे घर संगम काव्य है, भरतनाट्यम है, इडली-डोसा की खुशबू है। मेरी बहनें कन्नड़ और तेलुगु भी दक्षिण से पुकारती हैं।


हिंदी - वणक्कम्, तमिल बहन! तुम्हारे बिना हमारा दक्षिण अधूरा है।


(गुजराती झाँझ बजाती, गरबा की छोटी चाल के साथ प्रवेश करती है।)

गुजराती - केम छो? मजामा! मैं मज़े में हूँ। मैं गुजराती हूँ। मेरे आँगन में गरबा नाचता है, ढोकला गुनगुनाता है, और व्यापार मेरी रगों में बहता है।

हिंदी - केम छो, गुजराती बहन! तुम्हारी मिठास और तुम्हारा उत्साह दोनों प्यारे हैं।


(बाएँ से बंगाली गुनगुनाती हुई आती है और दाएँ से मराठी।)

बंगाली - नमोस्कार! मैं बांग्ला हूँ। कण्ठ में रवीन्द्रनाथ का गीत, दुर्गा पूजा की ढाक, और थाली में रसगुल्ला!

मराठी - नमस्कार! मी मराठी आहे! शिवाजी महाराज की भूमि से आई हूँ। ज्ञानेश्वरी है, गणपति बप्पा मोरया है, पुरणपोली की मिठास है!


(पूर्व से असमिया और ओड़िया साथ-साथ आती हैं।)

असमिया - नमस्कार! ब्रह्मपुत्र के तट से आई हूँ — असमिया। बिहू मेरे घर नाचता है। मेरी बहनें बोडो, मणिपुरी, खासी, मिजो भी पूर्वोत्तर से हाथ हिलाती हैं।

ओड़िया - नमस्कार! मैं ओड़िया हूँ — ओडिशा की कला। जगन्नाथ की रथयात्रा, ओडिसी नृत्य, पट्टचित्र — सब मेरे आँगन की बातें हैं।


(उत्तर से कश्मीरी धीरे-धीरे; भोजपुरी इठलाती हुई पीछे-पीछे।)

कश्मीरी - आदाब! मैं कश्मीरी हूँ। वादियों में बोली जाती हूँ, अतिथि के स्वागत में तैयार रहती हूँ। मेरी बहन डोगरी भी उन घाटियों में गूँजती है।

भोजपुरी - प्रणाम! मैं भोजपुरी — बिहार की बोली, हिंदी की छोटी बहन। हमारे घर अपनापन बहुत है। मेरी बहन मैथिली भी साथ है।


(पश्चिम से राजस्थानी और पंजाबी महफ़िल की चाल से।)

राजस्थानी - खम्मा घणी! मैं राजस्थानी हूँ। मेवाड़ का शौर्य तुमने सुना होगा। हर पंद्रह कोस पर मेरी बोली बदल जाती है, पर स्वाद दाल-बाटी जैसा एक ही रहता है।

पंजाबी - सत श्री अकाल! बड़ी महफ़िल सजी है आज। लगती है सब बहनें चौपाल जमाए बैठी हैं! 


(उर्दू और संस्कृत साथ प्रवेश।)

उर्दू - आदाब! यह चौपाल नहीं, संसद है — जहाँ भाषाएँ एक-दूसरे को सहयोग से देखती-समझती हैं।

संस्कृत - नमस्ते। मैं संस्कृत — देवभूमि की प्राचीन वाणी। मेरे कई शब्द बहनों के घर बस गए हैं, जैसे दीये का प्रकाश कई आँगनों में फैल जाए।


(सभी बाल-कलाकार घेरा बनाकर खड़े हैं भाषाओं के प्रतीक रूप में।)

हिंदी - वाह! आज वाटिका में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम — सब एक आँगन में हैं। भारत माँ मुस्करा रही होंगी।


दृश्य 2 · गर्व की हवा 


(थोड़ी देर चुप्पी। तमिल गर्व से सिर उठाती है।)

तमिल - सच कहूँ तो… मेरी भाषा सबसे प्राचीन है। दो हज़ार साल पहले भी मेरे कवि गा रहे थे।

संस्कृत - प्राचीनता मेरी भी थाती है। वेद मेरे कंठ से निकले।

गुजराती - प्राचीन होना अच्छी बात है, पर जीवंत होना भी ज़रूरी है ना! मेरे व्यापारी समुद्र पार गए, मेरी भाषा दुनिया घूमी।

बंगाली - और साहित्य? गीतांजलि सुनकर सारा विश्व झूम उठा।

मराठी- तेज और भक्ति दोनों मेरे पास हैं। संत ज्ञानेश्वर से छत्रपति तक — मेरी भाषा ने इतिहास लिखा।


(हिंदी हाथ उठाती है। सब शांत।)

हिंदी - अरे बहनों, रुको। गर्व सुंदर है। जड़ें प्यारी हैं। पर जब हम एक-दूसरे से ऊँची होने लगती हैं, तो भारत माँ उदास हो जाती हैं।


(सब सिर झुकाते हैं, फिर मुस्कराते हैं।)

तमिल - सच कहा। माफ़ करना। मुझे अपनी जड़ें प्यारी हैं, पर मैं अकेली पूरी बगिया नहीं हूँ।

गुजराती - हाँ। मिलकर बैठें तो मजामा, अलग हों तो सूना।


दृश्य 3 · हम एक-दूसरे की ताकत


हिंदी - तो चलो एक खेल। हर बहन बताए — तुमने इस देश को क्या दिया?

तमिल - तुम रोज़ बोलती हो — करी, चटनी, इडली, डोसा, सांभर। ये शब्द मेरे घर से निकले। मैंने भारत की थाली में स्वाद भरा।

गुजराती - और मैं? ढोकला, गरबा, डांडिया। फिल्मों में “केम छो” सुनकर लोग मुस्कराते हैं। मेरी भाषा ने हिम्मत दी — कुछ कर गुजरने की।

बंगाली - मैंने दिया रवीन्द्र-गीत और दुर्गा की ढाक — वह प्यार जो गाने में बसता है।


(मराठी, असमिया, ओड़िया, कश्मीरी, भोजपुरी, राजस्थानी, पंजाबी बारी-बारी एक-एक शब्द जोड़ती हैं।)

सभी मिलकर कहती हैं - गणपति बप्पा मोरया! बिहू! रथयात्रा! आदाब! प्रणाम! खम्मा घणी! सत श्री अकाल!

उर्दू - मैंने ग़ज़ल दी, आदाब दिया, और वह नज़ाकत जिससे बात भी इत्र की तरह फैलती है।

हिंदी - और मैं? मैं सबकी सहेली हूँ। मैंने तुम्हारे शब्द अपने में सजाए। किताब, सिनेमा, परीक्षा — सभी को एक मंच देती हूँ। पर मैं अकेली कुछ नहीं। तुम्हारे बिना मेरी थाली फीकी, मेरा गीत अधूरा, मेरा देश अधूरा।


(सब हाथ थाम लेती हैं।)

तमिल - मैं तमिल हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।

गुजराती - मैं गुजराती हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।

बंगाली - मैं बांग्ला हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।

मराठी - मी मराठी आहे, पण मी भारताची लेक आहे।

सभी - हम सब भारत की बेटियाँ हैं। एक-दूसरे की बहन। भारत माँ की आवाज़।


दृश्य 4 · समापन गीत


(तिरंगा बीच में। हिंदी सूत्रधार।)

हिंदी - दर्शकों, याद रखना — भाषाएँ अनेक हैं, भाव एक है। हम एक-दूसरे की ताकत हैं। हम एक-दूसरे से समृद्ध होती हैं। कोई छोटी नहीं, कोई बड़ी नहीं। सब मिलकर भारत हैं। विविधता में एकता — यही हमारी पहचान है।


(हाथ थामे, सरल ताल। गीत दो बार दोहराया जा सकता है।)

सभी एक साथ गाते हैं - 

भाषाएँ अनेक, भाव तो एक,

भारत माँ का यही विवेक।

एक की लय, दूसरी की ताल,

एक का गीत, दूसरे का हाल।

हर भाषा दूसरी भाषा को गले लगाए,

हर बोली का सभी मिलकर मान बढ़ाए।

उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम,

हम सब मिलकर एक हैं निश्चित।

विविधता में एकता हमारा मान,

जय भारत, जय हिन्द, जय महान!


हिंदी - धन्यवाद श्रोताओं! धन्यवाद गुरुजनों! आज से जब कोई नई भाषा सुनाई दे, उसे पराई मत समझना। वह भी हमारी बहन है। वणक्कम्, केम छो, नमोस्कार, नमस्कार, खम्मा घणी, सत श्री अकाल, आदाब, और नमस्ते! आइए, पड़ोसी की भाषा का एक शब्द आज ही सीखें। जय हिन्द, जय भारत।

सभी - भारत माता की जय! सभी भाषाओं की जय! एकता की जय!

(हाथ जोड़कर प्रणाम। मंचन समाप्त।)


मंचन संकेत - अभिवादन और बोलना शुद्ध हों। यदि मंचन समय कम हो तो दृश्य 1 में असमिया से पंजाबी तक एक समूह-प्रवेश दिया जा सकता है; हिंदी, तमिल, गुजराती अलग-अलग अवश्य आएँ। मंचन श्रेष्ठ हो, इसके लिए एक निर्देशक (Director) चुने और संगीत टीम के साथ तारतम्य बनाए रखें। 


गुरुवार, 10 सितंबर 2026

पौराणिक कथा — रावण के शिव-भक्त होने की कथा

पौराणिक कथा — रावण के शिव-भक्त होने की कथा

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रावण हिमालय-अंचल में विचरण कर रहा था। तभी नंदी ने पूछा - कौन है तू? इस अगम वन में क्यों घूम रहा है? रावण ने निर्भय कहा - तू कौन है ऐसा पूछने वाला? यह वन अगम कैसे? नंदी बोला - यहाँ देव-दैत्य-पूजित भगवान् शिव का धाम है। यह निषिद्ध क्षेत्र है। भाग जा यहाँ से।


मैं उन्हें देखना चाहता हूँ। तू कौन है मुझे रोकने वाला? यह कहकर रावण कैलाश की ओर चढ़ने लगा। नंदी ने उसे पीछे ठेल दिया। रावण ने क्रोध में नंदी को दूर फेंक दिया। मल्लयुद्ध हुआ; रावण विजयी रहा। तब नंदी उसे शिव के पास ले गया। रावण ने अपना परिचय दिया। शिव ने पूछा - क्या तूने ज्येष्ठ कुबेर की अवज्ञा की? रावण बोला - मैं ऐसा नहीं मानता। कुबेर ने यक्ष-संस्कृति रखी, मैंने रक्ष-संस्कृति। मूलमंत्र है—वयं रक्षामः। जो सहमत, उसे अभय; जो नहीं, वह शत्रु। शिव ने कहा - मैं तुझसे सहमत नहीं। रावण बोला - तो युद्ध करें।


शिव ने त्रिशूल उठाया, रावण ने कुठार। युद्ध चला। शीघ्र ही रावण थककर हाँफने लगा, बोला - विराम चाहता हूँ। आप युद्ध नहीं, खिलवाड़ करते हैं। आप देव हैं, मैं सेवक। कल्याण कीजिए। 


शिव ने हाथ उठाया और कहा - कल्याण हो। तेरा शौर्य स्तुत्य है, तू अजेय है। तेरी रक्ष-संस्कृति क्या है?


रावण ने कहा - वयं रक्षामः—हम रक्षा करते हैं। आर्यों ने आर्यावर्त बनाकर जनों को दक्षिणारण्य में बहिष्कृत किया। सागर के द्वीपों में आर्य-अनार्य अनेक जातियाँ बसती हैं, परस्पर विवाह भी होता है। रक्ष-संस्कृति में सबका समावेश हो, सभी की रक्षा हो—यही मेरा उद्देश्य है।


शिव प्रसन्न हुए और बोले - तेरा प्रयास स्तुत्य है। मैं तुझसे प्रसन्न हूँ। 


रावण घुटनों के बल बैठकर चरणों में सिर नवाया। शिव ने कहा - कल्याणं ते भवतु! शिवं ते अस्तु!


इस प्रकार रावण शिव का भक्त बना।


सादर,  

केशव राम सिंघल 


रविवार, 16 अगस्त 2026

नाटक - आइए! गणेश जी महाराज से बहुत कुछ सीखें!

नाटक - आइए! गणेश जी महाराज से बहुत कुछ सीखें!

लेखक - केशव राम सिंघल 

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प्रस्तुति संबंधी सामान्य निर्देश


* यह नाटक गणेश चतुर्थी के अवसर पर या किसी अन्य अवसर पर बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है।

* बाल कलाकारों की संख्या: 5 से 10 (सूत्रधार सहित) रहे।

* नाटक अभ्यास और प्रस्तुति के लिए एक उपयुक्त निर्देशक भी हो। 

* मंच के बीच में सामने गणेश जी की सुंदर मूर्ति रखी जाए।

* सभी बाल कलाकार मूर्ति के सामने अर्ध-चंद्राकार में खड़े हों, ताकि मूर्ति और कलाकारों के चेहरे दोनों दर्शकों को साफ दिखें।

* जयकारे के समय ढोल-मंजीरा या गणेश भजन का उपयुक्त संगीत बजे।

* बोलते समय कलाकार संबंधित इशारे अवश्य करें (कान पर हाथ, पेट दिखाना, सूँड का इशारा आदि)।

* आवाज़ साफ़, धीमी-तेज़ का संतुलन और भावपूर्ण हो।



नेपथ्य से सूत्रधार - भाइयों और बहनों! यहाँ उपस्थित सभी दर्शकों को नमस्कार। आज का दिन बहुत ही शुभ दिन है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर शिव-पार्वती नंदन सिद्धि-विनायक गणेश जी हमारे बीच आए हुए हैं। आइए! सभी मिलकर गणेश जी महाराज का जयकारा लगाएँ—

सभी (मंच पर प्रवेश करते हुए, संगीत के साथ) - “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया! गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया!”


(जिस समय जयकारा हो रहा हो, एक-एक कर सभी बाल कलाकार मंच पर आते हैं। वे गणेश जी की मूर्ति के सामने झुककर आदर व्यक्त करते हैं और अर्ध-चंद्राकार में मूर्ति के दोनों ओर खड़े हो जाते हैं। सूत्रधार भी मंच पर आ जाता है।)


सूत्रधार - गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया! भगवान् गणेश जी पूजा-पाठ के प्रथम देवता हैं। साथ ही वे हमारे अनमोल गुरु भी हैं।


बाल कलाकार 1 - (हाथ से मस्तक का इशारा करते हुए) - बहुत कुछ सीख सकते हैं हम गणेश जी महाराज से और अपने जीवन में सफल हो सकते हैं। देखो, गणेश जी का हाथी जैसा बड़ा मस्तक! यह हमें सिखाता है कि हमें बड़ी सोच रखनी चाहिए और हर फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए।


बाल कलाकार 2 - (मस्तक की ओर इशारा करते हुए) - यह विशाल मस्तक हमें विशाल बुद्धि, दूर दृष्टि और गहरी समझ का संदेश देता है। इसलिए भावनाओं में बहकर नहीं, सोच-समझकर फैसला लें। 


बाल कलाकार 3 - (दोनों हाथों से कानों को छूते हुए और फिर मुँह की ओर इशारा करते हुए) - गणेश जी महाराज के बड़े कान और छोटा मुँह हमें सिखाते हैं— सफल होना है तो सुनो अधिक, बोलो कम।


सूत्रधार - गणेश जी महाराज की लंबी सूँड छोटी और बड़ी दोनों तरह की चीजें उठा सकती है। क्या सीख सकते हैं हम इससे?


बाल कलाकार 4 - (हाथ से सूँड का इशारा करते हुए) - मित्रों, यही तो गणेश जी महाराज का लचीलापन है। हर सवाल का एक ही समाधान नहीं हो सकता। बदलते हालात के अनुसार हमें अपनी रणनीति बदलनी चाहिए।


बाल कलाकार 5 - (दृढ़ स्वर में) - गणेश जी महाराज विघ्नहर्ता हैं। वे सिखाते हैं कि हमें अपनी मुश्किलों को समझना चाहिए और उनका हल खोजने का उपाय सोचना चाहिए।


बाल कलाकार 6 - (हाथ जोड़कर विनम्र भाव से) - गणेश जी महाराज विनम्रता सिखाते हैं। कितने बड़े देवता हैं गणेश जी, फिर भी उनका वाहन छोटा चूहा है। यही तो असली विनम्रता है।


सूत्रधार - अरे वाह! क्या बात कही मेरे मित्र ने। गणेश जी महाराज की जय हो! साथियों, उनका पेट भी कितना बड़ा है।


बाल कलाकार 7 - (दोनों हाथों से पेट की ओर इशारा करते हुए) - गणेश जी का बड़ा पेट हमें सिखाता है कि हमें सभी तरह के अनुभवों— अच्छे और बुरे— को पचाने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।


बाल कलाकार 8 - (आश्चर्य व्यक्त करते हुए, एक हाथ से दाँत का इशारा करते हुए) - पता है, गणेश जी महाराज ने महाभारत लिखते समय अपना एक दाँत तोड़कर लेखनी बनाई थी। कुछ पाने के लिए कुछ त्याग करना पड़ता है। लक्ष्य पाने के लिए एकाग्रता ही सफलता की कुंजी है।


बाल कलाकार 9 - (हाथ जोड़कर) - हर शुभ कार्य से पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। हमें हर नए काम की शुरुआत सही तरीके से करनी चाहिए। अच्छी शुरुआत ही आधा काम है।


सूत्रधार - गणेश जी के चार हाथों में अलग-अलग वस्तुएँ हैं, जो जीवन में हमें संतुलन रखने का पाठ पढ़ाती हैं। आइए, हम अपने जीवन में काम, परिवार, टीम और अपने विकास में यथोचित संतुलन बनाए रखें।


सभी बाल कलाकार (एक स्वर में, हाथ जोड़कर) - सिद्धि विनायक गणेश जी महाराज की जय हो!


सूत्रधार - विघ्न हरने वाले, मंगल कर्ता, सिद्धि के दाता, बुद्धि के दाता गणेश जी महाराज की जय हो! आइए, आज हम सब गणेश जी से ये पाठ सीखकर अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।(संगीत के साथ सभी फिर से जयकारा लगाते हैं— “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया!”)


अंत में, नाटक के निर्देशक मंच पर आते हैं और सभी कलाकारों का संक्षिप्त परिचय दर्शकों से कराते हैं। सभी कलाकार मूर्ति की ओर झुककर प्रणाम करते हैं और मंच से विदा होते हैं।

(नाटक समाप्त)


कलाकारों के लिए अतिरिक्त निर्देश


* बोलते समय चेहरे पर भाव रखें— गंभीरता, आश्चर्य, विनम्रता और उत्साह।

* अर्ध-चंद्राकार में खड़े रहते हुए एक-दूसरे को ढकें नहीं।

* जयकारे के समय ताली या हाथ हिलाकर उत्साह दिखाएँ।

* मूर्ति के सामने झुकते समय सम्मान का भाव बनाए रखें।

* निर्देशक के मार्गदर्शन में अभ्यास करते समय इशारों को स्वाभाविक बनाने का प्रयास करें।


यह नाटक लगभग 8 से 10 मिनट में आसानी से मंचित हो जाएगा।


इस नाटक के गैरव्यावसायिक मंचन के लिए लेखक की सामान्य स्वीकृति है। कृपया मंचन की जानकारी लेखक को ईमेल से या इस पोस्ट की टिप्पणी में देने का प्रयास करें। धन्यवाद। 


शुभकामनाओं के साथ, 

केशव राम सिंघल 

शनिवार, 8 अगस्त 2026

प्राचीन यूनानी परंपरा से प्रेरित एक साहित्यिक पुनर्कल्पना - सृष्टि का उदभव

प्राचीन यूनानी परंपरा से प्रेरित एक साहित्यिक पुनर्कल्पना  

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सृष्टि का उदभव 

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यवनों की कल्पना में 

सृष्टि की यात्रा कैओस से आरम्भ हुई—एक ऐसे असीम शून्य से, 

जहाँ न व्यवस्था थी, न समय था और न ही जीवन, 

वही अनंत रिक्तता कैओस थी, 

उसी से प्रकृति, देवत्व और समस्त सृष्टि का क्रमिक प्राकट्य हुआ।


उसी असीम शून्य (कैओस) से पृथ्वी (गीया),

अन्धकार (एरीबस),

पृथ्वी के भीतर गहन अन्धकार (तारटरस), 

रात्रि (निक्स),

प्रेम (एरॉस) जैसी आदिम शक्तियाँ प्रकट हुईं। 


रात्रि (निक्स) और अन्धकार (एरीबस) से 

देवताओं के रहने की जगह व्योम (ईथर) और दिन (हेमरा) उत्पन्न हुए। 


पृथ्वी (गीया) से आकाश (यूरेनस), समुद्र (पौंटस), और पर्वतों का उद्भव हुआ।  

सृष्टि अपना आकार ले रही थी। 


जब पृथ्वी (गीया) और आकाश (यूरेनस) का मिलन हुआ,

उनके संसर्ग से अनेक टाइटनों की उत्पत्ति हुई, 

जो विभिन्न शक्तियों के प्रतीक थे, उनमें प्रमुख थे -

ओकिएनस, सूर्य (हाइपेरियन), इएपिटस, रीया, धरती की देवी (थेमिस), टेथिस और क्रोनस। 

क्रोनस की पत्नी रीया थी, 

ओकिएनस की पत्नी टेथिस थी, जिसने पृथ्वी के चारों ओर बहती नदियाँ पैदा कीं 

और 

इएपिटस की पत्नी धरती की देवी (थेमिस) थी। 

पृथ्वी (गीया) से गोल-गोल आँखों वाले (साइक्लोप) नामक तीन दानव - 

(ब्रांटिस, स्टेरॉप्स और आरगिस)  

और 

सौ बाँहों वाले तीन और दानव 

(ब्रायेरियस, काटास और गाइस) पैदा हुए। 


सृष्टि क्रमशः विकसित हो रही थी, 

प्रकृति अपने विविध रूप धारण कर रही थी, 

मानो समस्त ब्रह्मांड सृजन के महान प्रजनन काल से गुजर रहा हो।

 

रात्रि (निक्स) से भाग्य (मरोस), मृत्यु (थेंटौस), नींद (हिप्नोस), प्रतिशोध (नेमसिस), विनाश (केर), स्वप्न, बुढ़ापे, कलह (एरिस), दोष निकालने की प्रवृत्ति (मोमॉस), पीड़ा, नियति (म्वायरा/म्वाराय) और प्रेमानंद (फिलाटीज) उत्पन्न हुए। 


रात्रि (निक्स) की पुत्री कलह (एरिस) ने अकाल, दुःख, लड़ाई, संहार, हत्या, मूढ़ता आदि को जन्म दिया। 


रात्रि (निक्स) से सभी देवी-देवता डरते थे, 

नियति (म्वायरा/म्वाराय) की तीन बहनें थीं, 

जो भाग्य का सूत काटती थीं,

इनके नाम थे - क्लॉथो, लैकिसिस और एट्रोपस,

यही तीनों मानव शिशु को जन्म के समय देखने आती हैं 

और उनका भाग्य लिखती हैं, 

क्लॉथो अपने हाथ तकुआ रखती है, 

लैकिसिस सूत कातती है 

और  

सबसे छोटी एट्रोपस का व्यवहार बहुत कठोर है क्योंकि वह मौत लिख देती है। 


समुद्र (पौंटस) बुद्धिमान, दयालु और भविष्यवक्ता वृद्ध समुद्रदेव (नीरियस) उत्पन्न हुआ, 

वृद्ध समुद्रदेव (नीरियस) और जलपरी (डोरिस) के संसर्ग से बहुत सी जलपरियों का जन्म हुआ ,

थेटिस उन्हीं जलपरियों में से एक थी, वह एकिलीज की माँ भी थी, 

नदियों (ओकिएनस) और उनकी पत्नी टेथिस ने न केवल नदियाँ पैदा की, 

अपितु उनसे तीन सहस्त्र सागरकन्याओं का जन्म हुआ। 


सूर्य (हाइपेरियन) और उसकी पत्नी थिआया ने 

हीलियस / सॉल नामक सूर्य और चन्द्रमा (लूना / सिलीने) 

और उषा (ईऔस / औरोरा) को जन्म दिया, 

प्रतिदिन प्रत्यूषकाल में उषा (ईऔस / औरोरा) 

अपने दो घोड़ों वाले रथ में बैठकर आती हैं 

और अपने भाई सूर्य (हीलियस) के आने की सूचना देती हैं। 


इस प्रकार यवनों की कल्पना में 

समस्त सृष्टि की यात्रा 

कैओस—उस असीम शून्य और रिक्त विस्तार—से आरम्भ हुई 

और धीरे-धीरे प्रकृति, देवत्व तथा जीवन के असंख्य रूपों में 

विकसित होती चली गई।


सादर,

केशव राम सिंघल 

(इस प्रस्तुति का आधार प्राचीन यूनानी मिथकीय परंपरा तथा होमर के इलियड का हिंदी अनुवाद है। विभिन्न यूनानी स्रोतों में देववंश और घटनाओं के विवरण में कुछ भिन्नताएँ मिलती हैं; यहाँ प्रस्तुत कथा उसी परंपरा का अनुसरण करती है, जिसका आधार इस लेखक ने ग्रहण किया है।)


शनिवार, 1 अगस्त 2026

360-डिग्री मूल्यांकन प्रणाली (360-Degree Evaluation System)

360-डिग्री मूल्यांकन प्रणाली (360-Degree Evaluation System)

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360-डिग्री मूल्यांकन प्रणाली कर्मचारी के प्रदर्शन और क्षमता का मूल्यांकन करने की एक संपूर्ण प्रणाली है।


पारंपरिक तरीकों में केवल नियोक्ता (Employer) अपने कर्मचारी (Employee) का आंकलन करता है। इसके विपरीत, 360-डिग्री प्रक्रिया में कर्मचारी का मूल्यांकन उसके आसपास के सभी प्रमुख स्रोतों द्वारा किया जाता है। इसमें निम्न प्रमुख स्रोत हो सकते हैं - 


- स्वयं का आंकलन (Self-Evaluation)

- मैनेजर या सीनियर (Manager / Supervisor)

- साथ काम करने वाले सहकर्मी (Peers / Colleagues)

- अधीनस्थ कर्मचारी (Subordinate Staff)

- ग्राहक या बाहरी हितधारक (Customers or External Stakeholder) आवश्यकतानुसार


इसका मुख्य उद्देश्य केवल मूल्यांकन करना (Rating) नहीं, बल्कि कर्मचारी की शक्तियों (Strengths) और सुधार के क्षेत्रों (Gaps in Perception) की पहचान करके उसके निरंतर विकास (Evolution/Development) का मार्ग प्रशस्त करना है।


360-डिग्री मूल्यांकन प्रणाली प्रक्रिया के मुख्य चरण (Steps)


इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए इसे निम्न 7 चरणों में विभाजित किया जा सकता है -


1. उद्देश्य तय करना और तैयारी (Objective Setting & Preparation) - सबसे पहले यह तय किया जाता है कि मूल्यांकन लक्ष्य क्या है—क्या यह नेतृत्व विकास (Leadership development) के लिए है, निष्पादन मूल्यांकन (Performance appraisal) के लिए है या प्रशिक्षण आवश्यकता (Training needs) की पहचान के लिए है। प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले मापदंडों (Criteria),  जैसे Competencies, Behavioral Traits, Leadership Qualities) को परिभाषित किया जाता है।


2. प्रश्नावली तैयार करना (Questionnaire Design) - एक स्पष्ट और तटस्थ प्रश्नावली तैयार की जाती है। इसमें ऑब्जेक्टिव प्रश्न (Likert Scale Rating, जैसे 1 से 5 की रेटिंग) और खुले प्रश्न (टिप्पणी या फीडबैक के लिए) शामिल होते हैं।


3. मूल्यांककों का चयन (Selection of Evaluators) - जिस कर्मचारी (Ratee) का मूल्यांकन किया जाना है, उसके लिए उपयुक्त फीडबैक देने वालों (Raters) का चयन किया जाता है। संतुलित दृष्टिकोण के लिए मैनेजर, 3-5 सहकर्मी और 3-5 जूनियर सदस्यों को चुना जाता है।


4. सर्वे का संचालन और डेटा संग्रह (Survey Administration & Data Collection) - सर्वे को आमतौर पर एक ऑनलाइन HRMS पोर्टल या गोपनीय सॉफ्टवेयर के माध्यम से भेजा जाता है। गोपनीयता (Anonymity) के लिए मैनेजर के अलावा अन्य सभी (Peers और Subordinates) का फीडबैक पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है ताकि सब बिना किसी डर या पक्षपात के निष्पक्ष राय दे सकें।


5. रिपोर्ट तैयार करना (Data Analysis & Report Generation) - प्राप्त सभी रेटिंग्स और टिप्पणियों का विश्लेषण (Analysis) किया जाता है। एक विस्तृत व्यक्तिगत रिपोर्ट (Individual Feedback Report) तैयार की जाती है, जिसमें कर्मचारी के स्वयं के आंकलन और दूसरों के आंकलन के बीच की तुलना (Blind Spots) की जाती है और कर्मचारी की शक्तियों की सूची (Strengths) के साथ सुधार के मुख्य क्षेत्र (Developmental Areas) का पता लगाया जाता है। 


6. फीडबैक सेशन और संवाद (Feedback C) - HR प्रतिनिधि या एक कुशल कोच/मैनेजर कर्मचारी के साथ आमने-सामने बैठकर रिपोर्ट साझा करता है। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि बातचीत का रुख सकारात्मक और विकासात्मक (Developmental) रहे, ताकि कर्मचारी अपने आपको रक्षात्मक (Defensive) महसूस न करे।


7. व्यक्तिगत विकास योजना (Individual Development Plan - IDP) - प्राप्त फीडबैक के आधार पर एक कार्य योजना (Action Plan) तैयार किया जाए, जिसमें आवश्यक ट्रेनिंग, मेंटरशिप और भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित किया जाता है ताकि कर्मचारी का वास्तविक उन्नयन (Evolution) हो सके।


संक्षेप में हम कह सकते हैं कि यह 360-डिग्री मूल्यांकन प्रणाली की प्रक्रिया यह बताती है कि कर्मचारी कैसा काम कर रहा है, साथ ही यह उजागर करती है कि कर्मचारी का व्यवहार और काम दूसरों को कैसा दिखता है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल