प्राचीन यूनानी परंपरा से प्रेरित एक साहित्यिक पुनर्कल्पना
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सृष्टि का उदभव
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यवनों की कल्पना में
सृष्टि की यात्रा कैओस से आरम्भ हुई—एक ऐसे असीम शून्य से,
जहाँ न व्यवस्था थी, न समय था और न ही जीवन,
वही अनंत रिक्तता कैओस थी,
उसी से प्रकृति, देवत्व और समस्त सृष्टि का क्रमिक प्राकट्य हुआ।
उसी असीम शून्य (कैओस) से पृथ्वी (गीया),
अन्धकार (एरीबस),
पृथ्वी के भीतर गहन अन्धकार (तारटरस),
रात्रि (निक्स),
प्रेम (एरॉस) जैसी आदिम शक्तियाँ प्रकट हुईं।
रात्रि (निक्स) और अन्धकार (एरीबस) से
देवताओं के रहने की जगह व्योम (ईथर) और दिन (हेमरा) उत्पन्न हुए।
पृथ्वी (गीया) से आकाश (यूरेनस), समुद्र (पौंटस), और पर्वतों का उद्भव हुआ।
सृष्टि अपना आकार ले रही थी।
जब पृथ्वी (गीया) और आकाश (यूरेनस) का मिलन हुआ,
उनके संसर्ग से अनेक टाइटनों की उत्पत्ति हुई,
जो विभिन्न शक्तियों के प्रतीक थे, उनमें प्रमुख थे -
ओकिएनस, सूर्य (हाइपेरियन), इएपिटस, रीया, धरती की देवी (थेमिस), टेथिस और क्रोनस।
क्रोनस की पत्नी रीया थी,
ओकिएनस की पत्नी टेथिस थी, जिसने पृथ्वी के चारों ओर बहती नदियाँ पैदा कीं
और
इएपिटस की पत्नी धरती की देवी (थेमिस) थी।
पृथ्वी (गीया) से गोल-गोल आँखों वाले (साइक्लोप) नामक तीन दानव -
(ब्रांटिस, स्टेरॉप्स और आरगिस)
और
सौ बाँहों वाले तीन और दानव
(ब्रायेरियस, काटास और गाइस) पैदा हुए।
सृष्टि क्रमशः विकसित हो रही थी,
प्रकृति अपने विविध रूप धारण कर रही थी,
मानो समस्त ब्रह्मांड सृजन के महान प्रजनन काल से गुजर रहा हो।
रात्रि (निक्स) से भाग्य (मरोस), मृत्यु (थेंटौस), नींद (हिप्नोस), प्रतिशोध (नेमसिस), विनाश (केर), स्वप्न, बुढ़ापे, कलह (एरिस), दोष निकालने की प्रवृत्ति (मोमॉस), पीड़ा, नियति (म्वायरा/म्वाराय) और प्रेमानंद (फिलाटीज) उत्पन्न हुए।
रात्रि (निक्स) की पुत्री कलह (एरिस) ने अकाल, दुःख, लड़ाई, संहार, हत्या, मूढ़ता आदि को जन्म दिया।
रात्रि (निक्स) से सभी देवी-देवता डरते थे,
नियति (म्वायरा/म्वाराय) की तीन बहनें थीं,
जो भाग्य का सूत काटती थीं,
इनके नाम थे - क्लॉथो, लैकिसिस और एट्रोपस,
यही तीनों मानव शिशु को जन्म के समय देखने आती हैं
और उनका भाग्य लिखती हैं,
क्लॉथो अपने हाथ तकुआ रखती है,
लैकिसिस सूत कातती है और एट्रोपस कैंची से काट कर मृत्यु लिख देती है,
सबसे छोटी एट्रोपस का व्यवहार बहुत कठोर है क्योंकि वह मौत लिख देती है।
समुद्र (पौंटस) बुद्धिमान, दयालु और भविष्यवक्ता वृद्ध समुद्रदेव (नीरियस) उत्पन्न हुआ,
वृद्ध समुद्रदेव (नीरियस) और जलपरी (डोरिस) के संसर्ग से बहुत सी जलपरियों का जन्म हुआ ,
थेटिस उन्हीं जलपरियों में से एक थी, वह एकिलीज की माँ भी थी,
नदियों (ओकिएनस) और उनकी पत्नी टेथिस ने न केवल नदियाँ पैदा की,
अपितु उनसे तीन सहस्त्र सागरकन्याओं का जन्म हुआ।
सूर्य (हाइपेरियन) और उसकी पत्नी थिआया ने
हीलियस / सॉल नामक सूर्य और चन्द्रमा (लूना / सिलीने)
और उषा (ईऔस / औरोरा) को जन्म दिया,
प्रतिदिन प्रत्यूषकाल में उषा (ईऔस / औरोरा)
अपने दो घोड़ों वाले रथ में बैठकर आती हैं
और अपने भाई सूर्य (हीलियस) के आने की सूचना देती हैं।
इस प्रकार यवनों की कल्पना में
समस्त सृष्टि की यात्रा
कैओस—उस असीम शून्य और रिक्त विस्तार—से आरम्भ हुई
और धीरे-धीरे प्रकृति, देवत्व तथा जीवन के असंख्य रूपों में
विकसित होती चली गई।
सादर,
केशव राम सिंघल
(इस प्रस्तुति का आधार प्राचीन यूनानी मिथकीय परंपरा तथा होमर के इलियड का हिंदी अनुवाद है। विभिन्न यूनानी स्रोतों में देववंश और घटनाओं के विवरण में कुछ भिन्नताएँ मिलती हैं; यहाँ प्रस्तुत कथा उसी परंपरा का अनुसरण करती है, जिसका आधार इस लेखक ने ग्रहण किया है।)
