सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

बैंक पेंशनर्स का पेंशन अपडेशन – एम. सी. सिंगला केस से उम्मीद

बैंक पेंशनर्स का पेंशन अपडेशन – एम. सी. सिंगला केस से उम्मीद 

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बैंक पेंशनर्स लंबे समय से पेंशन अपडेशन के लिए संघर्षरत हैं। हर बार निराशा मिली, क्योंकि मामला वर्षों से लंबित रहा। कुछ वर्ष पहले आईबीए (IBA) और यूएफबीयू (UFBU) के बीच एक्स-ग्रेशिया समझौते से उम्मीद जगी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा। पेंशनर्स के संगठनों में एकता की कमी और आईबीए की अनिच्छा ने समस्या बढ़ाई। फिर भी, अब उम्मीद है कि यह कानूनी अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिलेगा।


BEPR 1995 का रेगुलेशन 35(1) (2003 संशोधित) स्पष्ट कहता है: "Basic pension and additional pension wherever applicable, shall be updated as per the formulae given in Appendix-I." यह प्रावधान अनिवार्य है, न कि वैकल्पिक। अपडेशन वेज रिविजन (wage revision) से जुड़ा है, जबकि DR (Dearness Relief) रेगुलेशन 37 के तहत महंगाई से राहत देता है। 2003 का संशोधन गजटेड और संसद द्वारा मान्य है, इसलिए बैंकों, आईबीए और डीएफएस (DFS) का इसे नजरअंदाज करना गलत है। वे बार-बार महंगाई राहत संशोधन (DR revision) का हवाला देकर भ्रम फैलाते हैं, जबकि अपडेशन रेगुलेशन में संरचनात्मक है।


पेंशन एक अधिकार है, कोई एहसान नहीं – सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि यह टाली गई मजदूरी है। RBI ने अपने पेंशनर्स के लिए अपडेशन लागू किया, तो बैंकों को क्यों नहीं? रेगुलेशन 56 CCS Rules का संदर्भ देता है।


05 फरवरी 2026 की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई (एम. सी. सिंगला बैंक पेंशन अपडेशन केस) - केस: M.C. Singla (Dead) Thr. LR. vs. Union of India (SLP (Civil) No. 5561/2016) - बेंच: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता (कोर्ट नंबर 2, वर्चुअल मोड) का संक्षिप्त ब्योरा 


- पेंशनर्स की तरफ से सीनियर एडवोकेट डॉ. मनिश सिंघवी ने दलीलें रखीं – पेंशन फंड का कॉर्पस ≈ ₹4.28 लाख करोड़, जबकि सालाना आउटगो ≈ ₹33,000 करोड़। पेंशन अपडेशन से बैंकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं, मौजूदा फंड से संभव। आरबीआइ (RBI) ने अपडेशन किया, बैंकों को भी करना चाहिए। रेगुलेशन्स के अनुसार अपडेशन अनिवार्य।  


- बैंकों/IBA/DFS की तरफ से सीनियर एडवोकेट श्री ध्रुव मेहता ने विरोध किया – अपडेशन से बैंकों पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ेगा और विभिन्न रिटायरमेंट बैचों (1987 से पहले/बाद) में असमानता बढ़ेगी।   


कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ओपन कोर्ट में यह ओपिनियन दिया कि रेगुलेशन्स के अनुसार बैंक पेंशन देने के लिए बाध्य हैं। दोनों को तुलनात्मक पेंशन टेबुलेशन (different retirement batches के लिए अंतर) दो हफ्तों में फाइल करने का निर्देश दिया। सुनवाई आंशिक (part-heard) रही। कोर्ट का ऑर्डर - "Heard. List the matter on 18th February 2026."  


सुप्रीम कोर्ट में चल रहा यह केस बैंक पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि 18 फरवरी 2026 को फाइनल दलीलें पूरी होंगी और फैसला बैंक पेंशनर्स के पक्ष में आएगा।  


सादर,  

केशव राम सिंघल  

 

आईबीए = IBA = Indian Bank's Association 

डीएफएस = DFS = Department of Financial Services , Ministry of Finance , Government of India 

यूएफबीयू = UFBU = United Forum of Bank Unions 

आरबीआई = RBI = Reserve Bank of India 


08 फरवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार आलेख तैयार किया गया। 


#BankPensionUpdation #MCSinglaCase #SupremeCourt #BankRetirees #PensionersRights #BankPension 


शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

मौलिकता

मौलिकता 
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


एक विचार सामने आया कि हर विचार पहले से ही ब्रह्मांड में मौजूद है, इसलिए कुछ भी वास्तव में मौलिक नहीं है।

यदि इस कथन का विश्लेषण करें तो हम पाते हैं कि यह कथन एक दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दर्शाता है, जो कई विचारधाराओं और सिद्धांतों में है। आइए इसे विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास करते हैं। दार्शनिक दृष्टिकोण से देखें तो दर्शनशास्त्र में यह विचार प्राचीन काल से ही मौजूद है कि सब कुछ पहले से ही अस्तित्व में है और व्यक्ति का ज्ञान और अनुभव केवल उसी का प्रतिबिंब या बदला हुआ रूप है। प्लेटो का "आइडियाज का सिद्धांत" भी इसी तरह का है, जिसमें उन्होंने कहा कि सभी विचार और रूप पहले से ही एक उच्च वास्तविकता में मौजूद हैं। यह सिद्धांत हमें यह समझने में मदद करता है कि संवेदनशील जगत की अस्थायी और परिवर्तनशील वस्तुओं के पीछे एक शाश्वत और अपरिवर्तनीय वास्तविकता होती है। हम कुर्सी का उदाहरण लेते हैं। इस जगत में हम विभिन्न प्रकार की कुर्सियाँ देखते हैं, जो अलग-अलग आकार, रंग और डिज़ाइन की होती हैं। लेकिन आइडियाज के जगत में कुर्सी का एक आदर्श रूप होता है, जो सभी कुर्सियों के लिए एक मानक या आदर्श के रूप में कार्य करता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इस संसार की सभी कुर्सियाँ कुर्सी के आदर्श रूप की अपूर्ण और अस्थायी अभिव्यक्तियाँ हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो हम पाते हैं कि आधुनिक भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान में भी यह विचार पाया जाता है कि ब्रह्मांड में सभी पदार्थ और ऊर्जा पहले से ही मौजूद हैं और वे केवल रूपांतरित होते हैं। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा का न तो निर्माण किया जा सकता है और न ही विनाश, केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखे तो हम पाते हैं कि अनेक आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं में भी यह विचार पाया जाता है कि सब कुछ पहले से ही ब्रह्म या परम सत्ता में मौजूद है। अद्वैत वेदांत जैसे दर्शन में यह माना जाता है कि ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है और बाकी सब उसकी अभिव्यक्ति है। 

एक अनुवर्ती प्रश्न सामने आता है कि क्या सृजनात्मकता मौलिक हो सकती है? हाँ, यदि हम सृजन को सापेक्ष दृष्टि से देखें। अर्थात् मौलिकता निरपेक्ष नहीं है, बल्कि सापेक्ष है। सापेक्षता का मतलब है कि हम किसी विचार, रचना या सृजन को उसके संदर्भ में देखेंगे। उदाहरण के लिए, एक कलाकार दो अलग-अलग तत्वों को मिलाकर एक नया रूप बना सकता है। भले ही दोनों तत्व पहले से मौजूद हों, लेकिन उनका संयोजन पहली बार हुआ हो। इस दृष्टि से वह रचना या सृजन उस व्यक्ति के लिए मौलिक हो सकती है। हर व्यक्ति का अनुभव, शिक्षा, संस्कृति और पृष्ठभूमि अलग होती है। इसलिए, दो लोगों के लिए एक ही विचार का अर्थ अलग हो सकता है। इस सापेक्षता के कारण, एक व्यक्ति के लिए जो विचार मौलिक है, दूसरे के लिए वह सामान्य हो सकता है। विज्ञान भी सापेक्षता का सिद्धांत प्रस्तुत करता है। उसी तरह, दर्शन में भी सापेक्षवाद (रिलेटिविज्म) कहता है कि सत्य और मूल्य संदर्भ पर निर्भर करते हैं। 

अब हम मौलिकता की अवधारणा को सापेक्ष दृष्टि से देखने का प्रयास करेंगे। हम पाते हैं कि मौलिकता का अर्थ केवल पूर्ण नवीनता नहीं है, बल्कि यह भी है कि कोई विचार, सृजन या रचना किसी विशेष संदर्भ में कितनी नवीन और प्रभावशाली है। जब हम विचार, सृजन और रचना को सापेक्ष दृष्टि से देखते हैं, तो हम नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं। इससे लोग नए विचार, सृजन और दृष्टिकोण को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। सापेक्ष दृष्टि व्यक्तिगत रचनात्मकता को महत्व देती है। जब लोग अपना विचार, अनुभव या  दृष्टिकोण साझा करते हैं, तो इससे अनोखे विचार उत्पन्न होते हैं, जो हमें नए लग सकते हैं। सापेक्ष दृष्टि सांस्कृतिक विविधता को भी महत्व देती है। अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के अपने अनोखे दृष्टिकोण और विचार होते हैं, जो सांस्कृतिक विविधता को सामने रखते हैं।

एक उदाहरण के रूप में, मैं भारतीय शास्त्रीय संगीत की बात करना चाहूँगा। भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों और तालों की एक समृद्ध परंपरा है। हालाँकि भारतीय संगीत के ये राग और ताल पहले से मौजूद हैं, लेकिन हर संगीतकार अपनी शैली और दृष्टिकोण से उन्हें नए और अनोखे तरीके से प्रस्तुत करता है। इस प्रकार, सापेक्ष दृष्टि से देखें तो हर संगीतकार की प्रस्तुति मौलिक होती है। मौलिकता को सापेक्ष दृष्टि से देखने से हमें यह समझने में मदद मिलती है कि नवाचार और रचनात्मकता के कई रूप हो सकते हैं। यह दृष्टिकोण हमें नए विचार, अनुभव और दृष्टिकोण अपनाने और व्यक्तिगत रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है।

पाठकों के विचार आमंत्रित हैं।

सादर, 
केशव राम सिंघल 


बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

वंदे मातरम् और सरल हिंदी भावार्थ

वंदे मातरम् और सरल हिंदी भावार्थ 












प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


वंदे मातरम् !
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वंदे मातरम् !
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम् !
शुभ्र ज्योत्स्ना-पुलकित यामिनीम्
फुलकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् 
सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम् 
सुखदां, वरदां मातरम् ! 

वंदे मातरम् ! 
सप्तकोटीकंठ-कलकल निनादकराले, 
द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,
अबला केणो मां तुमि एतो बले !
बहुबलधारिणीम् नमामि तारिणीम् 
रिपुदलवारिणीम् मातरम् !

वंदे मातरम् !
तुमि विद्या, तुमि धर्म, 
तुमि हरी, तुमि कर्म, 
तवं ही प्राणः शरीरे !
बाहुते तुमि मां शक्ति, 
हृदये तुमि मां भक्ति, 
तोमारई प्रतिमा गड़ी मंदिरे-मंदिरे !
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरण धारिणीं,
कमला कमल - दल- विहारिणीं !
वाणी विद्यादायिनीं नमामि त्वं, 
नमामि कमलां, अमलां, अतुलाम् !
सुजलां, सुफलां, मातरम् !

वंदे मातरम् !
श्यामलां, सरलां, सुस्मितां, भूषिताम् !
धरणी, भरणी मातरम् !

वंदे मातरम् !

सौजन्य - आनंदमठ, बंकिमचंद्र चटर्जी 

सरल हिंदी भावार्थ
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हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम जल से परिपूर्ण हो, फल-फूल और अन्न से समृद्ध हो।
तुम्हारी हवा मलय पर्वत की शीतल सुगंध से भरी हुई है।
तुम खेतों की हरियाली से ढकी हुई हो।
चाँदनी रातें तुम्हारे सौंदर्य को और बढ़ाती हैं।
तुम्हारे वृक्ष फूलों से लदे हैं और पत्तियाँ शोभायमान हैं।
तुम सदा मुस्कुराने वाली हो, मधुर भाषा बोलने वाली हो।
तुम सुख देने वाली और वरदान देने वाली हो।
हे माता! मैं तुम्हें वंदन करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम्हारे करोड़ों पुत्रों के कंठ से उठने वाला स्वर बहुत शक्तिशाली है।
तुम्हारे करोड़ों हाथों में शस्त्रों जैसी शक्ति है।
तुम देखने में कोमल लगती हो, फिर भी तुममें अपार बल है।
तुम अनेक शक्तियों से युक्त हो।
मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ, क्योंकि तुम संकटों से तारने वाली हो।
तुम शत्रुओं का नाश करने वाली हो।
हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम ही विद्या हो, तुम ही धर्म हो।
तुम ही हरि (ईश्वर) हो और तुम ही कर्म हो।
तुम ही शरीर में प्राण रूप में विद्यमान हो।

तुम्हारे बाहुओं में शक्ति है और हृदय में भक्ति है।
हर मंदिर में तुम्हारी ही प्रतिमा स्थापित है।

तुम दुर्गा के रूप में हो, जो दस हथियारों को धारण करती हैं।
तुम लक्ष्मी के रूप में हो, जो कमल पर विराजमान रहती हैं।
तुम सरस्वती के रूप में हो, जो ज्ञान देने वाली हैं।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम कमल के समान पवित्र हो, निर्मल हो और अतुलनीय हो।
हे जल और अन्न से परिपूर्ण माता! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ। 

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
तुम हरियाली से युक्त हो, सरल और सहज स्वभाव वाली हो।
तुम सदा मुस्कुराने वाली और आभूषणों से सुशोभित हो।
तुम धरती हो और पालन करने वाली माता हो।
मैं तुम्हें बार-बार प्रणाम करता हूँ।

हे मातृभूमि! मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ।
मैं तुम्हें नमन करता हूँ, वंदन करता हूँ, और श्रद्धा से प्रणाम करता हूँ।

धन्यवाद, 
केशव राम सिंघल 

सोमवार, 26 जनवरी 2026

2020 की एक लघुकथा - कोरोना के डर से दरकता रिश्ता

2020 की एक लघुकथा - 

कोरोना के डर से दरकता रिश्ता 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

मार्च 2020 की वह शाम अभी भी उसकी स्मृतियों में धुँधली-सी नहीं, बल्कि बहुत स्पष्ट है। प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन सुनते ही जैसे पूरे देश की साँसें थम गई थीं। “आज रात बारह बजे से सम्पूर्ण लॉकडाउन…” इतना सुनते ही उसकी आँखों के सामने अंधेरा-सा छा गया। मुंबई की ऊँची इमारतों के बीच काम करता वह एक साधारण मजदूर था, पर उसके सपने असाधारण थे—घर लौटने के, अपनों से मिलने के।


काम बंद हो गया। ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए। किराये का कमरा, रोज़ का खर्च और जेब में चंद रुपये—इन सबने उसे एक ही राह दिखाई, घर जाना है, चाहे पैदल ही क्यों न जाना पड़े।


उसने सुना बहुत से मजदूर अपने घर जा रहे हैं। अगली सुबह वह सैकड़ों मजदूरों के साथ सड़क पर था। कोई कह रहा था,“भाई, ट्रेनें तो बंद हैं, कैसे जाएँगे?” वह बस इतना बोला, “रुकने से अच्छा है चल पड़ें, शायद मंज़िल खुद रास्ता बना ले।”


धूप, भूख, थकान और डर—सब उसके साथ चलते रहे। कहीं पुलिस रोकती, कहीं लोग दूरी बनाकर देखते। कोई खाना या पानी देता तो हाथ आगे बढ़ाने से पहले हिचकता, मानो इंसान नहीं, कोई बड़ा खतरा खड़ा हो। उसे यह दूरी सबसे ज़्यादा चुभती थी—शरीर से ज़्यादा दिलों में बनी दूरी। इंसान इंसान से दूर हो चला था। 


रास्ते भर वह यही सोचता रहा— घर पहुँचते ही माँ गले लगाएगी, भाई के बच्चे लिपट जाएँगे… सारी थकान मिट जाएगी। पंद्रह दिनों की पैदल यात्रा के बाद जब वह अपने गाँव पहुँचा तो शाम ढल चुकी थी। थका शरीर, सूखे होंठ और आँखों में चमक—घर की चौखट देखकर उसके कदम तेज़ हो गए। उसने दरवाज़े पर दस्तक दी।


अंदर से आवाज आई— “कौन?”

“मैं हूँ… तुम्हारा भाई।”


कुछ क्षण की खामोशी के बाद दरवाज़ा नहीं खुला। अंदर से धीमी-सी आवाज आई— “भैया… आप बाहर ही रुकिए। गाँव में कहा गया है कि बाहर से आए लोग सीधे घर न आएँ… कोरोना का खतरा है।”


वह सन्न रह गया। जिस घर की ओर वह हर कदम पर उम्मीद लेकर चला था, वही घर अब उसे खतरा समझ रहा था।


“मैं… मैं तुम्हारा अपना हूँ…” उसकी आवाज काँप गई।


पर जवाब में सिर्फ चुप्पी थी। वह चौखट पर बैठ गया—थका हुआ नहीं, बल्कि टूटा हुआ। उसे अब पैरों की पीड़ा नहीं साल रही थी, साल रही थी रिश्तों में आई वह दरार, जिसे न पैदल चलकर पाटा जा सकता था, न आँसुओं से। रात गहराती गई और वह वहीं बैठा रहा— घर के बाहर, अपनों के बहुत पास… और फिर भी बहुत दूर। थकान से वह बेहाल है और बार-बार अपनी लम्बी पैदल यात्रा को याद कर वह रोने लगता है।


केशव राम सिंघल 

लेखक द्वारा लिखी कहानी "कोरोना का डर और दरकता रिश्ता" ब्लॉग पोस्ट लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

रविवार, 12 अक्टूबर 2025

हमास और इजरायल के बीच समझौता - शान्ति की ओर एक कदम

हमास और इजरायल के बीच समझौता - शान्ति की ओर एक कदम 

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युद्ध और शान्ति का प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


आखिरकार मध्यस्थों की लगातार कोशिश के बाद हमास और इजरायल में एक बार फिर समझौता हो गया। यह समझौता 9-10 अक्टूबर 2025 को घोषित हुआ। इसे "ट्रंप प्लान" भी कहा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके दूत (स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुश्नर) ने मध्यस्थता में प्रमुख भूमिका निभाई। यह समझौता गाजा में दो वर्ष पुराने युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों का पहला चरण है। यह बहु-चरणीय प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें बंधक-कैदी विनिमय, युद्धविराम और पुनर्निर्माण शामिल हैं। इस समझौते के मुख्य प्रावधान निम्न हैं - 


-  गाजा में तत्काल युद्धविराम लागू होगा। इजरायली सेना गाजा से आंशिक रूप से पीछे हटेगी, विशेष रूप से गाजा सिटी के आसपास के क्षेत्रों से, लेकिन पूरी तरह से गाजा छोड़ने की बजाय बफर जोन पर रहेगी। बफर जोन की सटीक सीमाएँ अभी अस्पष्ट हैं और पहले चरण के कार्यान्वयन के दौरान तय होंगी। 

  

-  हमास 7 अक्टूबर 2023 के हमले में पकड़े गए सभी 48 बंधकों (जिनमें अब 20 जीवित और 28 मृत हैं) की रिहाई करेगा। जीवित बंधकों, जिनमें ज्यादातर युवा इजरायली सैनिक हैं, की रिहाई 72 घंटों के भीतर शुरू होगी। बदले में, इजरायल लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा, जिसमें सभी फिलिस्तीनी महिलाएँ और बच्चे, 250 लंबी सजा काट रहे कैदी, और युद्ध शुरू होने के बाद गिरफ्तार लगभग 1,750 लोग शामिल हैं। रिहाई प्रक्रिया "चरणबद्ध" होगी। सभी बंधक और कैदी एक साथ रिहा नहीं होंगे। 


-  गाजा में भोजन, दवाओं और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। इसके लिए रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग (Rafah Crossing) खोला जाएगा, जिससे मिस्र के साथ गाजा का आवागमन आसान हो सकेगा। क्रॉसिंग का संचालन यूरोपीय संघ (EU) और फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) की निगरानी में होगा। गाजा में घरों, सड़कों, जल और बिजली प्रणालियों का पुनर्निर्माण होगा। रफाह बॉर्डर क्रॉसिंग (Rafah Crossing) गाजा पट्टी और मिस्र के बीच एकमात्र सीमा पार करने वाला प्रमुख मार्ग है। मानवीय सहायता (भोजन, दवाएँ, ईंधन, चिकित्सा सामग्री) के ट्रकों को बिना बाधा के मिस्र से गाजा में प्रवेश करने की अनुमति मिलेगी। ऐसा विश्वास किया जाता है कि प्रारंभिक चरण में प्रतिदिन लगभग 600 ट्रक सहायता पहुँचा सकते हैं। घायल, बीमार या अन्य जरूरतमंद फिलिस्तीनियों को मिस्र की ओर जाने की अनुमति, जिसमें पैदल यात्री मार्ग भी शामिल है। यह 20 लाख से अधिक विस्थापित फिलिस्तीनियों के लिए राहत का काम करेगा। रफाह क्रॉसिंग को 14 अक्टूबर 2025 से पैदल मार्ग के साथ फिर से खोलने की योजना है। 


- जैसे गाजा से इजरायली सैनिकों के हटने का प्रावधान समझौते में है,उसी प्रकार हमास को गाजा में अपना सैन्य हथियारबंदी करनी होगी और लगभग दो दशकों से चली आ रही शासन व्यवस्था छोड़नी होगी। "योग्य फिलिस्तीनियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों" की एक संक्रमणकालीन शासन समिति बनेगी, जिसकी निगरानी "पीस बोर्ड" करेगा, जिसके अध्यक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे। इसमें फिलिस्तीनी स्व-निर्धारण और गाजा के लिए दो-राज्य समाधान की "विश्वसनीय राह" का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।


यह समझौते के अनुसार की जाने वाली प्रक्रिया का पहला चरण है, जो कई हफ्तों-महीनों तक चलेगा। बाद के चरणों में पूर्ण सैन्य वापसी, निरस्त्रीकरण और पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत 50 बिलियन डॉलर है और यह 4-5 वर्षों में होगा। फंडिंग में अनेक देश योगदान देंगे। कई देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान में फंडिंग तथा पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जताई है। एक फंडिंग तंत्र स्थापित किया जाएगा। यह GREAT (Gaza Reconstitution, Economic Acceleration and Transformation) ट्रस्ट पर आधारित होगा, जो बहुपक्षीय दान, ऋण तथा निवेश के माध्यम से संसाधन जुटाएगा। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2025 के लिए 4 बिलियन डॉलर की अपील की है (जिसका 28% फंडिंग हो गया है), यूरोपीय संघ (EU) तथा अन्य देश (जैसे अमेरिका, इटली, जापान आदि) भी सहयोग देंगे। फंडिंग में सऊदी अरब, यूएई, कतर, और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख योगदानकर्ता शामिल होंगे। अमेरिका शान्ति ओर पुनर्निर्माण के लिए नेतृत्वकर्ता भूमिका निभाएगा। 


बफर जोन गाजा पट्टी के उन क्षेत्रों को संदर्भित करता है, जो इजरायल की सीमा (उत्तरी और पूर्वी गाजा) और गाजा के आंतरिक हिस्सों के बीच एक सीमित, नियंत्रित क्षेत्र के रूप में कार्य करेंगे। यह विशेष रूप से गाजा सिटी के आसपास और फिलाडेल्फी कॉरिडोर (गाजा-मिस्र सीमा) के निकट केंद्रित होगा। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ इजरायली सेना (IDF) पूर्ण सैन्य नियंत्रण या गहन ऑपरेशन नहीं करेगी। इसमें सैन्य चौकियाँ, निगरानी उपकरण, और सीमित गश्ती दल शामिल हो सकते हैं।


इजरायल का मानना है कि बफर जोन हमास के राकेट हमलों, सुरंगों के निर्माण, या सीमा पार हमलों को रोकने के लिए आवश्यक है। 7 अक्टूबर 2023 के हमास के हमले के बाद, जिसमें 1,200 इजरायली मारे गए थे। इजरायल इस तरह सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। बफर जोन में ड्रोन, सेंसर, और सैन्य टावरों का उपयोग किया जाएगा ताकि गाजा से इजरायल की ओर किसी भी गतिविधि पर नजर रखी जा सके। समझौते के अनुसार, हमास को सैन्य हथियारबंदी करनी होगी। बफर जोन यह सुनिश्चित करेगा कि हथियारों का पुनर्गठन न हो। समझौते के तहत, इजरायली सेना को गाजा सिटी और अन्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों से हटाना होगा, जहाँ युद्ध के कारण भारी विनाश हुआ। लेकिन इजरायली सेना पूर्ण वापसी की बजाय बफर जोन में तैनात रहेगी।


इस आलेख के लेखक का मानना है कि बफर जोन गाजा के उपयोग योग्य क्षेत्र को और सीमित कर सकता है, क्योंकि युद्ध के कारण गाजा की बहुत सी खेती और आवासीय भूमि नष्ट हो गई है। यह फिलिस्तीनियों के लिए आवागमन और पुनर्निर्माण को जटिल बना सकता है। हालाँकि यह जोन इजरायल को मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है, फिर भी फिलिस्तीनी पक्ष गाजा में इजरायली सेना की उपस्थिति को "इजरायली कब्जे का विस्तार" मान सकता है। रफाह क्रॉसिंग के खुलने के बावजूद, बफर जोन में सैन्य उपस्थिति मानवीय सहायता वितरण की निगरानी को प्रभावित कर सकती है, हालाँकि समझौते में मानवीय सहायता को "बिना बाधा" सुनिश्चित करने का वादा किया गया है।


मिस्र के शर्म एल-शेख में अनेक वार्ताएँ हुईं, जो मध्यस्थता का एक महत्वपूर्ण स्थान था। यह समझौता अनेक अप्रत्यक्ष वार्ताओं के कारण हुआ, जिसमें मुख्य मध्यस्थ निम्न रहे - 


- संयुक्त राज्य अमेरिका - राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, जिसमें उनके मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुश्नर प्रमुख भूमिका निभा रहे। अमेरिका ने युद्ध समाप्ति की गारंटी दी।


- मिस्र, कतर और तुर्की - अरब मध्यस्थों ने वार्ताओं की मेजबानी की और मानवीय प्रावधानों को समझौते में शामिल करने पर ध्यान दिया।


इजरायल और फिलीस्तीन के बीच विवाद बहुत पहले से है और 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला कर दिया था, जिसके कारण हमास और इजरायल के बीच लगातार युद्ध चल रहा था। इस हमले में लगभग 1,200 इजरायली (ज्यादातर नागरिक) मारे गए थे। इजरायल की जवाबी कार्रवाई में 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी, फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे मारे गए, गाजा के अधिकांश घर-स्कूल-अस्पताल नष्ट हो गए, और 20 लाख से अधिक फिलीस्तीनी विस्थापित हुए। इस समझौते से पहले नवंबर 2023 और जनवरी 2025 में अस्थायी युद्धविराम हुए थे, जो टूट गए। इजरायल ने गाजा में हमास को कमजोर किया, नागरिक हताहतों के कारण गाजा के नागरिकों ने अंतरराष्ट्रीय अलगाव और काफी दुःख झेला।


हालाँकि इजरायल कैबिनेट ने समझौते का पहला चरण मंजूर किया, लेकिन दक्षिणपंथी मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने कैदियों की रिहाई पर आपत्ति जताई है। हमास नेता महमूद मरदावी ने इसे "फिलिस्तीनी दृढ़ता की जीत" बताया। दोनों पक्षों में उत्साह है, लेकिन समझौते की सफलता की कोई गारंटी नहीं है। पहले हुए समझौते भी टूट गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मिस्र और इजरायल की यात्रा करेंगे और इजरायल संसद को संबोधित करेंगे। पिछले समझौतों के टूटने के इतिहास को देखते हुए  इस आलेख के लेखक का मानना है कि इस समझौते के टूटने का खतरा लगातार बना हुआ है। भविष्य के गर्भ में क्या है, यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। फिर भी यह समझौता शांति और मानवीय राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे गाजा में युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट कम होगा। आशा की जानी चाहिए कि दोनों पक्ष शान्ति की और बढे और स्थाई समाधान निकले।  


आपको यह आलेख कैसा लगा, कृपया अपनी राय से अवगत कराएँ।  


सादर,

केशव राम सिंघल