बाल नाटक - भारत की भाषाएँ
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अवधि - 12–15 मिनट
रचनाकार - केशव राम सिंघल
मंच - मंच पर सामने भारत का मानचित्र। सामने बोर्ड पर लिखा हो — भाषा वाटिका। प्रत्येक बाल-कलाकार के गले में अपनी भाषा का पट्टा।
पात्र - हिंदी (सूत्रधार) · तमिल · गुजराती · बंगाली · मराठी · असमिया · ओड़िया · कश्मीरी · भोजपुरी · राजस्थानी · पंजाबी · उर्दू · संस्कृत
दृश्य 1 · भाषा वाटिका में
(धीमी रोशनी। हिंदी तिरंगा लेकर दर्शकों की ओर मुड़ती है।)
हिंदी - नमस्ते बच्चों! नमस्ते अतिथियों और गुरुजनों! मैं हिंदी हूँ — किताबों की भाषा, गीतों की भाषा। आज मेरी वाटिका में बहुत सी बहनें आने वाली हैं। हमारी अपनी बहनें — भारत की भाषाएँ!
(तमिल हाथ जोड़कर, मल्लिका सजाए, धीरे नाचते हुए आती है।)
तमिल - वणक्कम्! मैं तमिल हूँ। द्रविड़ भाषाओं की बड़ी बहन। मेरे घर संगम काव्य है, भरतनाट्यम है, इडली-डोसा की खुशबू है। मेरी बहनें कन्नड़ और तेलुगु भी दक्षिण से पुकारती हैं।
हिंदी - वणक्कम्, तमिल बहन! तुम्हारे बिना हमारा दक्षिण अधूरा है।
(गुजराती झाँझ बजाती, गरबा की छोटी चाल के साथ प्रवेश करती है।)
गुजराती - केम छो? मजामा! मैं मज़े में हूँ। मैं गुजराती हूँ। मेरे आँगन में गरबा नाचता है, ढोकला गुनगुनाता है, और व्यापार मेरी रगों में बहता है।
हिंदी - केम छो, गुजराती बहन! तुम्हारी मिठास और तुम्हारा उत्साह दोनों प्यारे हैं।
(बाएँ से बंगाली गुनगुनाती हुई आती है और दाएँ से मराठी।)
बंगाली - नमोस्कार! मैं बांग्ला हूँ। कण्ठ में रवीन्द्रनाथ का गीत, दुर्गा पूजा की ढाक, और थाली में रसगुल्ला!
मराठी - नमस्कार! मी मराठी आहे! शिवाजी महाराज की भूमि से आई हूँ। ज्ञानेश्वरी है, गणपति बप्पा मोरया है, पुरणपोली की मिठास है!
(पूर्व से असमिया और ओड़िया साथ-साथ आती हैं।)
असमिया - नमस्कार! ब्रह्मपुत्र के तट से आई हूँ — असमिया। बिहू मेरे घर नाचता है। मेरी बहनें बोडो, मणिपुरी, खासी, मिजो भी पूर्वोत्तर से हाथ हिलाती हैं।
ओड़िया - नमस्कार! मैं ओड़िया हूँ — ओडिशा की कला। जगन्नाथ की रथयात्रा, ओडिसी नृत्य, पट्टचित्र — सब मेरे आँगन की बातें हैं।
(उत्तर से कश्मीरी धीरे-धीरे; भोजपुरी इठलाती हुई पीछे-पीछे।)
कश्मीरी - आदाब! मैं कश्मीरी हूँ। वादियों में बोली जाती हूँ, अतिथि के स्वागत में तैयार रहती हूँ। मेरी बहन डोगरी भी उन घाटियों में गूँजती है।
भोजपुरी - प्रणाम! मैं भोजपुरी — बिहार की बोली, हिंदी की छोटी बहन। हमारे घर अपनापन बहुत है। मेरी बहन मैथिली भी साथ है।
(पश्चिम से राजस्थानी और पंजाबी महफ़िल की चाल से।)
राजस्थानी - खम्मा घणी! मैं राजस्थानी हूँ। मेवाड़ का शौर्य तुमने सुना होगा। हर पंद्रह कोस पर मेरी बोली बदल जाती है, पर स्वाद दाल-बाटी जैसा एक ही रहता है।
पंजाबी - सत श्री अकाल! बड़ी महफ़िल सजी है आज। लगती है सब बहनें चौपाल जमाए बैठी हैं!
(उर्दू और संस्कृत साथ प्रवेश।)
उर्दू - आदाब! यह चौपाल नहीं, संसद है — जहाँ भाषाएँ एक-दूसरे को सहयोग से देखती-समझती हैं।
संस्कृत - नमस्ते। मैं संस्कृत — देवभूमि की प्राचीन वाणी। मेरे कई शब्द बहनों के घर बस गए हैं, जैसे दीये का प्रकाश कई आँगनों में फैल जाए।
(सभी बाल-कलाकार घेरा बनाकर खड़े हैं भाषाओं के प्रतीक रूप में।)
हिंदी - वाह! आज वाटिका में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम — सब एक आँगन में हैं। भारत माँ मुस्करा रही होंगी।
दृश्य 2 · गर्व की हवा
(थोड़ी देर चुप्पी। तमिल गर्व से सिर उठाती है।)
तमिल - सच कहूँ तो… मेरी भाषा सबसे प्राचीन है। दो हज़ार साल पहले भी मेरे कवि गा रहे थे।
संस्कृत - प्राचीनता मेरी भी थाती है। वेद मेरे कंठ से निकले।
गुजराती - प्राचीन होना अच्छी बात है, पर जीवंत होना भी ज़रूरी है ना! मेरे व्यापारी समुद्र पार गए, मेरी भाषा दुनिया घूमी।
बंगाली - और साहित्य? गीतांजलि सुनकर सारा विश्व झूम उठा।
मराठी- तेज और भक्ति दोनों मेरे पास हैं। संत ज्ञानेश्वर से छत्रपति तक — मेरी भाषा ने इतिहास लिखा।
(हिंदी हाथ उठाती है। सब शांत।)
हिंदी - अरे बहनों, रुको। गर्व सुंदर है। जड़ें प्यारी हैं। पर जब हम एक-दूसरे से ऊँची होने लगती हैं, तो भारत माँ उदास हो जाती हैं।
(सब सिर झुकाते हैं, फिर मुस्कराते हैं।)
तमिल - सच कहा। माफ़ करना। मुझे अपनी जड़ें प्यारी हैं, पर मैं अकेली पूरी बगिया नहीं हूँ।
गुजराती - हाँ। मिलकर बैठें तो मजामा, अलग हों तो सूना।
दृश्य 3 · हम एक-दूसरे की ताकत
हिंदी - तो चलो एक खेल। हर बहन बताए — तुमने इस देश को क्या दिया?
तमिल - तुम रोज़ बोलती हो — करी, चटनी, इडली, डोसा, सांभर। ये शब्द मेरे घर से निकले। मैंने भारत की थाली में स्वाद भरा।
गुजराती - और मैं? ढोकला, गरबा, डांडिया। फिल्मों में “केम छो” सुनकर लोग मुस्कराते हैं। मेरी भाषा ने हिम्मत दी — कुछ कर गुजरने की।
बंगाली - मैंने दिया रवीन्द्र-गीत और दुर्गा की ढाक — वह प्यार जो गाने में बसता है।
(मराठी, असमिया, ओड़िया, कश्मीरी, भोजपुरी, राजस्थानी, पंजाबी बारी-बारी एक-एक शब्द जोड़ती हैं।)
सभी मिलकर कहती हैं - गणपति बप्पा मोरया! बिहू! रथयात्रा! आदाब! प्रणाम! खम्मा घणी! सत श्री अकाल!
उर्दू - मैंने ग़ज़ल दी, आदाब दिया, और वह नज़ाकत जिससे बात भी इत्र की तरह फैलती है।
हिंदी - और मैं? मैं सबकी सहेली हूँ। मैंने तुम्हारे शब्द अपने में सजाए। किताब, सिनेमा, परीक्षा — सभी को एक मंच देती हूँ। पर मैं अकेली कुछ नहीं। तुम्हारे बिना मेरी थाली फीकी, मेरा गीत अधूरा, मेरा देश अधूरा।
(सब हाथ थाम लेती हैं।)
तमिल - मैं तमिल हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।
गुजराती - मैं गुजराती हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।
बंगाली - मैं बांग्ला हूँ, पर मैं भारत की बेटी हूँ।
मराठी - मी मराठी आहे, पण मी भारताची लेक आहे।
सभी - हम सब भारत की बेटियाँ हैं। एक-दूसरे की बहन। भारत माँ की आवाज़।
दृश्य 4 · समापन गीत
(तिरंगा बीच में। हिंदी सूत्रधार।)
हिंदी - दर्शकों, याद रखना — भाषाएँ अनेक हैं, भाव एक है। हम एक-दूसरे की ताकत हैं। हम एक-दूसरे से समृद्ध होती हैं। कोई छोटी नहीं, कोई बड़ी नहीं। सब मिलकर भारत हैं। विविधता में एकता — यही हमारी पहचान है।
(हाथ थामे, सरल ताल। गीत दो बार दोहराया जा सकता है।)
सभी एक साथ गाते हैं -
भाषाएँ अनेक, भाव तो एक,
भारत माँ का यही विवेक।
एक की लय, दूसरी की ताल,
एक का गीत, दूसरे का हाल।
हर भाषा दूसरी भाषा को गले लगाए,
हर बोली का सभी मिलकर मान बढ़ाए।
उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम,
हम सब मिलकर एक हैं निश्चित।
विविधता में एकता हमारा मान,
जय भारत, जय हिन्द, जय महान!
हिंदी - धन्यवाद श्रोताओं! धन्यवाद गुरुजनों! आज से जब कोई नई भाषा सुनाई दे, उसे पराई मत समझना। वह भी हमारी बहन है। वणक्कम्, केम छो, नमोस्कार, नमस्कार, खम्मा घणी, सत श्री अकाल, आदाब, और नमस्ते! आइए, पड़ोसी की भाषा का एक शब्द आज ही सीखें। जय हिन्द, जय भारत।
सभी - भारत माता की जय! सभी भाषाओं की जय! एकता की जय!
(हाथ जोड़कर प्रणाम। मंचन समाप्त।)
मंचन संकेत - अभिवादन और बोलना शुद्ध हों। यदि मंचन समय कम हो तो दृश्य 1 में असमिया से पंजाबी तक एक समूह-प्रवेश दिया जा सकता है; हिंदी, तमिल, गुजराती अलग-अलग अवश्य आएँ। मंचन श्रेष्ठ हो, इसके लिए एक निर्देशक (Director) चुने और संगीत टीम के साथ तारतम्य बनाए रखें।
