सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

बैंक पेंशनर्स का पेंशन अपडेशन – एम. सी. सिंगला केस से उम्मीद

बैंक पेंशनर्स का पेंशन अपडेशन – एम. सी. सिंगला केस से उम्मीद 

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बैंक पेंशनर्स लंबे समय से पेंशन अपडेशन के लिए संघर्षरत हैं। हर बार निराशा मिली, क्योंकि मामला वर्षों से लंबित रहा। कुछ वर्ष पहले आईबीए (IBA) और यूएफबीयू (UFBU) के बीच एक्स-ग्रेशिया समझौते से उम्मीद जगी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा। पेंशनर्स के संगठनों में एकता की कमी और आईबीए की अनिच्छा ने समस्या बढ़ाई। फिर भी, अब उम्मीद है कि यह कानूनी अधिकार सुप्रीम कोर्ट से मिलेगा।


BEPR 1995 का रेगुलेशन 35(1) (2003 संशोधित) स्पष्ट कहता है: "Basic pension and additional pension wherever applicable, shall be updated as per the formulae given in Appendix-I." यह प्रावधान अनिवार्य है, न कि वैकल्पिक। अपडेशन वेज रिविजन (wage revision) से जुड़ा है, जबकि DR (Dearness Relief) रेगुलेशन 37 के तहत महंगाई से राहत देता है। 2003 का संशोधन गजटेड और संसद द्वारा मान्य है, इसलिए बैंकों, आईबीए और डीएफएस (DFS) का इसे नजरअंदाज करना गलत है। वे बार-बार महंगाई राहत संशोधन (DR revision) का हवाला देकर भ्रम फैलाते हैं, जबकि अपडेशन रेगुलेशन में संरचनात्मक है।


पेंशन एक अधिकार है, कोई एहसान नहीं – सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि यह टाली गई मजदूरी है। RBI ने अपने पेंशनर्स के लिए अपडेशन लागू किया, तो बैंकों को क्यों नहीं? रेगुलेशन 56 CCS Rules का संदर्भ देता है।


05 फरवरी 2026 की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई (एम. सी. सिंगला बैंक पेंशन अपडेशन केस) - केस: M.C. Singla (Dead) Thr. LR. vs. Union of India (SLP (Civil) No. 5561/2016) - बेंच: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता (कोर्ट नंबर 2, वर्चुअल मोड) का संक्षिप्त ब्योरा 


- पेंशनर्स की तरफ से सीनियर एडवोकेट डॉ. मनिश सिंघवी ने दलीलें रखीं – पेंशन फंड का कॉर्पस ≈ ₹4.28 लाख करोड़, जबकि सालाना आउटगो ≈ ₹33,000 करोड़। पेंशन अपडेशन से बैंकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं, मौजूदा फंड से संभव। आरबीआइ (RBI) ने अपडेशन किया, बैंकों को भी करना चाहिए। रेगुलेशन्स के अनुसार अपडेशन अनिवार्य।  


- बैंकों/IBA/DFS की तरफ से सीनियर एडवोकेट श्री ध्रुव मेहता ने विरोध किया – अपडेशन से बैंकों पर फाइनेंशियल बोझ बढ़ेगा और विभिन्न रिटायरमेंट बैचों (1987 से पहले/बाद) में असमानता बढ़ेगी।   


कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ओपन कोर्ट में यह ओपिनियन दिया कि रेगुलेशन्स के अनुसार बैंक पेंशन देने के लिए बाध्य हैं। दोनों को तुलनात्मक पेंशन टेबुलेशन (different retirement batches के लिए अंतर) दो हफ्तों में फाइल करने का निर्देश दिया। सुनवाई आंशिक (part-heard) रही। कोर्ट का ऑर्डर - "Heard. List the matter on 18th February 2026."  


सुप्रीम कोर्ट में चल रहा यह केस बैंक पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण है। उम्मीद है कि 18 फरवरी 2026 को फाइनल दलीलें पूरी होंगी और फैसला बैंक पेंशनर्स के पक्ष में आएगा।  


सादर,  

केशव राम सिंघल  

 

आईबीए = IBA = Indian Bank's Association 

डीएफएस = DFS = Department of Financial Services , Ministry of Finance , Government of India 

यूएफबीयू = UFBU = United Forum of Bank Unions 

आरबीआई = RBI = Reserve Bank of India 


08 फरवरी 2026 तक की जानकारी के अनुसार आलेख तैयार किया गया। 


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