बुधवार, 2 जुलाई 2025

यहूदी-ईसाई-मुस्लिम-डूज समुदाय, यरूशलम और इजरायल - 1

यहूदी-ईसाई-मुस्लिम-डूज समुदाय, यरूशलम और इजरायल - 1 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

इस आलेख शृंखला में हम यहूदी, ईसाई, मुस्लिम और डूज समुदायों के बारे में चर्चा करेंगे और साथ ही यरूशलम और इजरायल के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे।  


अरब रेगिस्तानी इलाका था और वहाँ के लोग घुमन्तु थे, जो लड़ते बहुत थे। अरब के लोगों में महिलाओं की स्थिति बहुत खराब थी। सबसे पहले अरब में यहूदी धर्म आया, जिसकी शुरुआत पैगम्बर अब्राहम लगभग 2000 ईसा पूर्व अर्थात आज से लगभग 4000 वर्ष पूर्व मानी जाती है।  यहूदी धर्म के बाद ईसाई धर्म पहली शताब्दी ईस्वी में शुरू हुआ और इस्लाम सातवीं शताब्दी ईस्वी करीब 610 ईस्वी में आया। ड्रूज (Druze) समुदाय का आगमन 10वीं-11वीं सदी (लगभग 986-1021 ईस्वी) में हुआ, जब यह इस्लाम के इस्माइली शाखा से अलग होकर एक स्वतंत्र धर्म बना।  इस प्रकार यहूदी धर्म सबसे प्राचीन (करीब 2000 ईसा पूर्व), फिर ईसाई धर्म (1वीं सदी), फिर इस्लाम (7वीं सदी) आया—ड्रूज इन सबसे बाद में अस्तित्व में आए।


इन चारों धर्मों में कई समानताएँ हैं, लेकिन कुछ ख़ास अंतर भी हैं। यहूदी, मुस्लिम और डूज धर्म एकेश्वरवादी हैं अर्थात् ईश्वर एक है। ईसाई धर्म में भी एक ईश्वर है, लेकिन वे त्रिमूर्ति (पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा) को मानते हैं। ईसाई धर्म में ईसा को भगवान् का पुत्र और उद्धारकर्ता माना जाता है। इस्लाम में ईसा को पैगम्बर माना जाता है, लेकिन ईश्वर का पुत्र नहीं। यहूदी धर्म ईसा को न तो मसीहा मानता है और न ही पैगम्बर। डूज समुदाय एक अनोखा एकेश्वरवादी धार्मिक और जातीय समूह है, जो मुख्यतः लेबनान, सीरिया, इजरायल और जॉर्डन में पाया जाता है। ये लोग अरबी बोलते हैं, लेकिन न तो खुद को मुस्लिम मानते हैं और न ही यहूदी या ईसाई। इनकी धार्मिक मान्यताएँ अलग हैं और इनकी धार्मिक पहचान भी ख़ास है।  


यहूदी धर्म का धार्मिक ग्रन्थ ड्रूज समुदाय का पवित्र ग्रंथ टोरा है, ईसाई धर्म का बाइबिल और इस्लाम का धार्मिक ग्रन्थ कुरान है। डूज समुदाय का पवित्र ग्रन्थ "रिसालत अल-हिकमा" (Epistles of Wisdom/किताब अल-हिकमा) है, जिसे सिर्फ उनके धार्मिक विद्वान ही पढ़ सकते हैं। 


यरूशलम तीनों धर्मों (यहूदी, ईसाई और इस्लाम) के लिए आस्था का स्थान है। यहूदी धर्म मानने वालों के लिए यरूशलम सबसे पवित्र शहर है, यहीं उनका प्राचीन मंदिर था, जिसे वे भगवान् का निवास स्थान मानते आए हैं। ईसाई धर्म के मानने वालों के लिए यरुशलम वह स्थान है जहां यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया, दफनाया गया और यहीं उनका पुनरुत्थान हुआ। इस्लाम में मक्का और मदीना के बाद यरुशलम तीसरा पवित्र शहर है। कहा जाता है कि यहीं से पैगम्बर ने मेराज (स्वर्ग की यात्रा) की थी और यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद है। यरुशलम डूज (Druze) समुदाय के लिए यहूदी, ईसाई और मुस्लिम धर्मों जितना महत्वपूर्ण नहीं है। यरुशलम मुख्य रूप से यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म के लोगों के लिए पवित्र शहर माना जाता है, लेकिन डूज समुदाय के धार्मिक केंद्र और तीर्थ स्थल लेबनान, सीरिया और इज़राइल के अन्य हिस्सों में हैं, न कि यरुशलम में। यरुशलम शहर का प्रशासन और रख-रखाव मुख्य रूप से इजरायल सरकार के पास है, लेकिन धार्मिक स्थलों की देखरेख उनके अपने धार्मिक ट्रस्ट या संगठनों द्वारा की जाती है। तीनों धर्मों के लोग आमतौर पर अपने-अपने पवित्र स्थलों पर जा सकते हैं, पर सुरक्षा कारणों से या तनाव के कारण कभी-कभी पाबंदिया लग जाती हैं, खासकर अल-अक्सा मस्जिद को लेकर मुस्लिमों के लिए।  


यहूदी और इस्लाम दोनों ही एकेश्वरवादी अर्थात् एक भगवान् को मानने वाले धर्म हैं और दोनों की जड़े अब्राहम से जुडी हैं, फिर भी यहूदी इस्लाम के बीच मन-मुटाव के कई कारण हैं। इस्लाम मानता है कि पैगम्बर मुहम्मद अंतिम पैगम्बर हैं, जबकि यहूदी इसे नहीं मानते।  इस्लाम धार्मिक ग्रन्थ कुरान और यहूदी धार्मिक ग्रन्थ टोरा की व्याख्याएँ अलग हैं। पैगम्बर मुहम्मद के समय यहूदियों ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया, जिससे दोनों धर्म मानने वालों के बीच टकराव शुरू हुआ और कई लड़ाईयाँ हुईं। 1948 में इजरायल बनने के बाद अरब देशों और इजरायल के बीच जमीन और यरुशलम जैसे पवित्र स्थलों को लेकर कई विवाद और संघर्ष हुए। यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों यरूशलम को पवित्र मानते हैं, लेकिन वहाँ नियंत्रण को लेकर लगातार संघर्ष चलता है। झगडे की जड़ सिर्फ धर्म नहीं, बल्कि राजनीति, इतिहास और जमीन का विवाद है। 


शेष अगले आलेख में .......... 


सादर, 

केशव राम सिंघल 


शनिवार, 7 जून 2025

शून्य की पूर्णता

शून्य की पूर्णता

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शून्य चित्र साभार - ओपनएआई (OpenAI)


शून्य है — 

निराकार, 

निर्वात (रिक्तता), 

फिर भी है पूर्णता का आधार। 


शून्य गणित की वह संख्या है, जिसे किसी भी संख्या में जोड़ने या घटाने पर मूल संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। शून्य शब्द संस्कृत के "śūnya" (शून्य) से आया है, जिसका अर्थ है – रिक्त, शून्यता।


100 + 0 = 100 

100 - 0 = 100 


शून्य एक अंक है जो संख्याओं के निरूपण के लिये प्रयुक्त आज की सभी स्थानीय मान पद्धतियों का अपरिहार्य प्रतीक है। इसके अलावा यह एक संख्या भी है। दोनों रूपों में गणित में इसकी अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। पूर्णांकों तथा वास्तविक संख्याओं के लिये यह योग का तत्समक अवयव (additive identity) है। 


हम सामान्यतः शून्य का प्रयोग खाली या 'कुछ नहीं' को दर्शाने के लिए करते हैं, परंतु उसी शून्य में बहुत कुछ समाहित है। यदि आप इसे गहराई से जानना चाहें, तो पहले स्वयं को जानिए। 


जब हमने शून्य को और गहराई से समझने का प्रयास किया, तो इसके निम्न अर्थ सामने आए — 


1. वह स्थान जिसमें कुछ भी न हो / खाली स्थान


2. आकाश


3. एकांत स्थान / निर्जन स्थान


4. बिंदु / बिंदी / सिफर (अरबी मूल का शब्द, जिसका अर्थ है – कुछ नहीं) 


5. अभाव / राहित्य / कुछ न होना। जैसे —तुम्हारे हिस्से में शून्य है।


6. स्वर्ग


7. विष्णु


8. ईश्वर 

कहैं एक तासों शिवे शून्य एकै। कहैं काल एकै महा विष्णु एकै। कहैं अर्थ एकै परब्रह्म जानो। प्रभा पूर्ण एकै सदा शून्य मानो।


9. कान में पहना जाने वाला एक गोलाकार आभूषण, जिसे शून्य रूप या ‘शून्य’ कहा जाता है।


शून्य की खोज भारत की एक अद्वितीय देन है। आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे गणितज्ञों ने शून्य को एक गणितीय संकल्पना के रूप में प्रस्तुत किया। ब्रह्मगुप्त (7वीं शताब्दी) ने शून्य के गणितीय नियमों को परिभाषित किया और इसे अन्य संख्याओं के साथ जोड़ने, घटाने आदि के सिद्धांत दिए। 


भारतीय दर्शन में शून्य को 'शून्यता' या निर्वाण के रूप में देखा गया है — जो न केवल अंत है, बल्कि एक नई चेतना का आरंभ भी है। बौद्ध दर्शन में ‘शून्यता’ (Śūnyatā) का तात्पर्य है कि कोई भी वस्तु स्थायी, स्वतंत्र या आत्मनिष्ठ नहीं है — सब कुछ आपसी निर्भरता से उत्पन्न होता है। यही बोध व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है।


शून्य और ब्रह्म (अद्वैत दृष्टिकोण) में शून्य को 'परब्रह्म' या 'पूर्णता' का प्रतीक माना गया है — "पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।" यहाँ ‘पूर्ण’ का अर्थ भी शून्य की ही भांति है — एक ऐसा खालीपन जो पूर्ण है। 


गणित में शून्य की महत्वपूर्ण भूमिका है। दशमलव पद्धति की नींव शून्य पर ही आधारित है। कंप्यूटर विज्ञान की बाइनरी प्रणाली (0 और 1) में भी शून्य एक मूलभूत आधार है। इसके बिना आधुनिक विज्ञान, गणित और तकनीक की कल्पना नहीं की जा सकती। 


पश्चिमी दुनिया में शून्य की अवधारणा 9वीं शताब्दी में अरब गणितज्ञों के माध्यम से पहुँची, जिन्होंने भारतीय अंकों और दशमलव पद्धति को अपनाया।


सार रूप में कह सकते हैं कि शून्य में कुछ नहीं, पर शून्य में हैं बहुत कुछ। 


शून्य —

जहाँ कुछ नहीं, वहीं से बहुत कुछ शुरू होता है।

यह खाली नहीं, बल्कि अनंत की संभावना है।


गणित में संतुलन,

दर्शन में मौन,

और अध्यात्म में मोक्ष —

सब समाहित है शून्य में।


प्रसिद्द कथन - "Zero is not nothing; it is the beginning of everything." (शून्य कुछ नहीं नहीं है; यह सब कुछ का आरंभ है।) 


 शून्य —

जहाँ अंत है, वहीं आरंभ भी है। 

जहाँ मौन है, वहीं संगीत भी है।

जहाँ खालीपन है, वहीं समग्रता है।


शून्य — नकार नहीं, बल्कि अनंत की ओर पहला कदम है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 



शुक्रवार, 6 जून 2025

क्रिप्टोकरेंसी पर चीन का सख्त रुख - वैश्विक प्रभाव और भारत की नीतियाँ

क्रिप्टोकरेंसी पर चीन का सख्त रुख - वैश्विक प्रभाव और भारत की नीतियाँ

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क्रिप्टोकरेंसी का प्रतीकात्मक चित्र - साभार NightCafe 

चीन ने क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन, इथेरियम, सोलाना,डॉजकॉइन, एडीए आदि) पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। मई 2025 तक की जानकारी के आधार पर, चीन ने न केवल क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग और माइनिंग पर प्रतिबंध लगाया है, बल्कि व्यक्तिगत क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग को भी अवैध घोषित कर दिया है। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन में क्रिप्टो वॉलेट पर कार्रवाई की गई है, लेकिन ब्लॉकचेन की प्रकृति के कारण यह तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। फिर भी, चीन सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित गतिविधियों पर सख्त निगरानी और दंडात्मक कार्रवाइयाँ शुरू कर दी हैं, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए कदम शामिल हैं। चीन में क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग पर भी प्रतिबन्ध लग गया है।  


चीन द्वारा क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध के कारण


चीन में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं - 


- मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध गतिविधियाँ - चीन सरकार का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी, और आतंकवादी वित्तपोषण जैसी अवैध और अपराध गतिविधियों के लिए हो सकता है, क्योंकि यह विकेन्द्रीकृत और गुमनाम है।


- वित्तीय स्थिरता को खतरा - क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिरता और अनियमित प्रकृति को चीन सरकार वित्तीय प्रणाली के लिए खतरा मानती है, जो पूंजी प्रवाह और मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकती है।


- डिजिटल युआन को बढ़ावा - चीन अब अपनी केंद्रीकृत डिजिटल मुद्रा, डिजिटल युआन (e-CNY), को बढ़ावा देना चाहती है, जो सरकार द्वारा नियंत्रित है। क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाकर, सरकार डिजिटल युआन को प्राथमिकता देना चाहती है।


- ऊर्जा खपत और पर्यावरण - क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग, विशेष रूप से बिटकॉइन, भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करता है, जो चीन के कार्बन न्यूट्रैलिटी लक्ष्यों के विपरीत है। 


चीन के क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रभाव 


चीन के क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबन्ध लगाने के फैसले का यह प्रभाव पड़ा है कि तमाम क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट आई है। कुछ देश क्रिप्टोकरेंसी को नियमन के दायरे में ला रहे हैं, जबकि अन्य (जैसे अल सल्वाडोर) इसे अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। चीन में क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग पर प्रतिबन्ध के कारण माइनर्स उन देशों का रुख करेंगे, जहाँ क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग पर प्रतिबन्ध नहीं है। 


विश्व में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने वाले देश


विश्व में कई देशों ने क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं। निम्नलिखित कुछ प्रमुख देश हैं - 


- चीन - जैसा कि ऊपर बताया गया, क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग, माइनिंग, और होल्डिंग पर पूर्ण प्रतिबंध।

- उत्तर कोरिया - क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध, क्योंकि इसे अवैध गतिविधियों से जोड़ा जाता है।

- बोलीविया - 2014 से क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध, क्योंकि यह बोलीविया केंद्रीय बैंक की नीतियों को कमजोर करता है।

- अल्जीरिया - 2018 से क्रिप्टोकरेंसी खरीद, बिक्री, और उपयोग पर प्रतिबंध।

- मोरक्को - 2017 से क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर प्रतिबंध, मनी लॉन्ड्रिंग की चिंताओं के कारण।

- नेपाल - 2017 से क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध, क्योंकि नेपाल में इसे अवैध माना जाता है।

- मिस्र - 2018 में क्रिप्टोकरेंसी को गैर-कानूनी घोषित किया गया, धार्मिक और वित्तीय स्थिरता के आधार पर।

- इराक - क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर प्रतिबंध, वित्तीय नियंत्रण बनाए रखने के लिए।


कुछ देशों जैसे बांग्लादेश, कतर, और सऊदी अरब में आंशिक प्रतिबंध हैं, जहाँ क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को सीमित किया गया है, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। इसके विपरीत, अल सल्वाडोर जैसे देशों ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार किया है। 


भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत सरकार के कदम


भारत में क्रिप्टोकरेंसी का नियमन एक जटिल और विकासशील मुद्दा है। भारत सरकार ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं -


- कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं - भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे कानूनी मुद्रा के रूप में भी मान्यता नहीं दी गई है। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने RBI द्वारा 2018 में लगाए गए क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर प्रतिबंध को हटा दिया था। 


- कर व्यवस्था - 2022 के केंद्रीय बजट में, भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर 30% टैक्स और प्रत्येक लेनदेन पर 1% TDS (स्रोत पर कर कटौती) लागू किया। भारत सरकार का यह कदम क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल संपत्ति के रूप में मान्यता देता है, न कि मुद्रा के रूप में। 


- नियामक ढांचे की योजना - भारत सरकार ने 2021 में "क्रिप्टोकरेंसी और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक" प्रस्तावित किया था, जिसका उद्देश्य निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और RBI द्वारा डिजिटल रुपये को बढ़ावा देना था। हालांकि, यह विधेयक अभी तक लागू नहीं हुआ है।


- मनी लॉन्ड्रिंग नियम - 2023 में, भारत में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लाया गया, जिसके तहत एक्सचेंजों को केवाईसी (KYC) और लेनदेन की निगरानी करनी होती है। 


- विदेशी एक्सचेंजों पर कार्रवाई - 2024 में, वित्त मंत्रालय ने बायनेंस जैसे कुछ विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के वेबसाइट (URL) पर प्रतिबंध लगाया, क्योंकि वे भारतीय नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। 


- भारतीय रिजर्व बैंक की सतर्कता - भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है और इसे "जुआ" की तरह माना है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल रुपये (CBDC) के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।


सार 


चीन ने क्रिप्टोकरेंसी पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, जो वित्तीय नियंत्रण, मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम, और डिजिटल युआन को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है। विश्व में कई अन्य देशों ने भी क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं। भारत में क्रिप्टोकरेंसी का नियमन प्रारंभिक चरण में है। कराधान और मनी लॉन्ड्रिंग नियमों के माध्यम से सरकार इसे नियंत्रित करने की दिशा में काम कर रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)  का डिजिटल रुपया भविष्य में क्रिप्टोकरेंसी के विकल्प के रूप में उभर सकता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


(आलेख-लेखक सेवानिवृत बैंक अधिकारी हैं तथा 'बिटकॉइन क्या है' किंडल पुस्तक के लेखक हैं, जो अमेजन पर उपलब्ध है।) 


गुरुवार, 5 जून 2025

🌿पर्यावरण के लिए सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक🌿

 🌿पर्यावरण के लिए सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक🌿











आज बच्चे हों या बड़े – सभी पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं। इस विषय में जानकारी की कोई कमी नहीं है, लेकिन व्यवहारिक अमल अत्यंत सीमित है। यह हमारी उदासीन मानसिकता को दर्शाता है कि जिस विषय पर हम सजग हैं, उसे केवल चर्चाओं और औपचारिक आयोजनों तक सीमित कर देते हैं। यह स्थिति निश्चित ही चिंता का विषय है।


आज विश्व पर्यावरण दिवस है। समाचार-पत्रों में पर्यावरण संबंधी लेख, विचार और आकंड़े प्रकाशित हो रहे हैं। मंचों पर भाषण हो रहे हैं। हम सब पर्यावरण के प्रति जागरूक दिखते हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या हमने स्वयं अपने जीवन में कोई बदलाव किया है? क्या हमने प्लास्टिक, पेट्रोल, बिजली जैसी संसाधनों की खपत को घटाने का प्रयास किया है?


सच्चाई यह है कि हम में से अधिकांश केवल 'पर्यावरण पर उपदेश' देने तक सीमित हैं। अब समय आ गया है कि हम केवल विचार और ज्ञान तक न रुकें, बल्कि अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।


विश्व पर्यावरण दिवस की **सार्थकता** तभी सिद्ध होगी, जब हम व्यक्तिगत, सामाजिक और नीति-निर्माण स्तर पर ठोस कदम उठाएँ। उदाहरण स्वरूप -


व्यक्तिगत स्तर पर - 


* पुनः उपयोग (Reuse), पुनः चक्रण (Recycle) और ऊर्जा संरक्षण जैसे उपाय अपनाएँ।

* बिजली, पानी और ईंधन की बचत करें।

* प्लास्टिक के प्रयोग से बचें।


✅  सामाजिक स्तर पर -


* स्थानीय स्तर पर जन-जागरण करें।

* स्कूलों, संस्थानों व कॉलोनियों में वृक्षारोपण व पर्यावरणीय गतिविधियाँ आयोजित करें।

* समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण करें।


नीति-निर्माण स्तर पर - 


* सरकारों पर पर्यावरण हितैषी नीतियाँ लागू करने का दबाव बनाएँ।

* विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दें।


हमें यह समझना होगा कि पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि 'हर दिन का जीवन मूल्य' है। पर्यावरण संरक्षण केवल एक "दिन" का मुद्दा नहीं है, यह हमारे "हर दिन" का व्यवहार बनना चाहिए। विचारों को कर्म में बदलना ही सच्चा पर्यावरण प्रेम है। जब विचारों को व्यवहार में ढाला जाएगा, तभी हम वास्तव में पर्यावरण प्रेमी कहला सकेंगे। 


🌱आइए, इस पर्यावरण दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने व्यवहार से धरती माँ का ऋण चुकाने की दिशा में सार्थक कदम उठाएँगे।


विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ,

केशव राम सिंघल


शुक्रवार, 30 मई 2025

नदी तू है जीवन का प्रतीक

नदी तू है जीवन का प्रतीक

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

नदी — 

तुम शांत बहती हुई मधुर लगती हो 

तुम प्यासे को तृप्त कर देती हो 

पर जब गुस्से में उफनती हो 

काँप उठते हैं सभी 

घाट-किनारे सब तोड़ देती हो 

छीन लेती हो संबल 

कर देती हो असहाय।


2

नदी तू है जीवन का प्रतीक

तेरी तरह जीवन भी निरंतर प्रवाह में रहता है 

— कभी शांत, कभी उथल-पुथल भरा।


जीवन की धारा, थमती नहीं कभी

सुख-दुःख के साथ बहती हैं जीवन की धाराएँ सभी।


शांत नदी हो सकती है संतुलित मन, करुणा, और सेवा का प्रतीक 

और हो सकती है तृप्ति, परोपकार, और शांति का उदाहरण सटीक  

ठीक वैसे ही जैसे संयमित, संवेदनशील और संतुलित मनुष्य समाज को करता है पोषित। 


शांत जल जैसे संयमित विचार, जलदान जैसे सेवा भाव

उफनती नदी जैसे क्रोध, असंतुलन, विनाश। 


नदी अपने किनारों को लाँघती है  

बाढ़ तभी आती है

वैसे ही जैसे मनुष्य क्रोध, लोभ, अहंकार के वशीभूत 

पहुँचा देता है नुकसान खुद को और औरों को। 

 

जब भीतर उठे तूफान, विवेक हो जाये मौन,

तब बहेगा जीवन जल, डुबो देगा जीवन की नाव।


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नदी — 

तेरी यात्रा होती है जैसे जीवन की यात्रा

तू पहाड़ों से निकलती है 

समतल में बहती है 

और अंत में समुद्र से मिल जाती है 

— जैसे हुआ जीवन का आरंभ (जन्म), 

प्रवाह (युवावस्था), 

और विसर्जन (मृत्यु)।


नदी — 

तू कभी चट्टानों से टकराई, कभी फूलों को छू लिया,

आखिर में सागर से मिल, तूने अपना अस्तित्व खो दिया।


हे जीवन दायित्री नदी — 

तू सिखा दे मर्यादा में मुझे बहना

तू सिखा दे बिना अभिमान के देना

तू सिखा दे विवेक के साथ उफनना। 


सादर,

केशव राम सिंघल