शनिवार, 6 जून 2026

बेबी बूमर्स - हमारी पीढ़ी

बेबी बूमर्स - हमारी पीढ़ी

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मैं 'बेबी बूमर्स' पीढ़ी का सदस्य हूँ, जो दुनिया की सबसे प्रभावशाली पीढ़ियों में से एक रही है। इस वर्ग में वे लोग आते हैं जिनका जन्म 1946 से 1964 के बीच हुआ। जब हमारी पीढ़ी का आगमन हुआ, तब तक द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था और पूरे विश्व में शांति व आर्थिक सुधार का दौर शुरू हो रहा था। उस समय दुनिया भर में जन्म दर में एक बहुत बड़ा उछाल आया, जिसके कारण ही इस पीढ़ी को 'बेबी बूमर्स' का नाम मिला।


हमारी पीढ़ी के लोग काम के प्रति बेहद समर्पित रहे हैं और हमने अपनी कड़ी मेहनत से आर्थिक समृद्धि के नए आयाम देखे हैं। टेलीविजन और कार सहित तमाम आधुनिक घरेलू उपकरणों का विस्तार हमारे ही सामने हुआ। आज इस पीढ़ी के लोग सीनियर सिटिज़न्स हैं, जिनकी उम्र 62 से 80 वर्ष के बीच है और अधिकांश लोग परिवारों में दादा-दादी या नाना-नानी की भूमिका निभा रहे हैं। हम आज भी पारंपरिक मूल्यों, आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारी को ही सर्वोपरि मानते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल


मेरे से पहले की पीढ़ी - मूक पीढ़ी (The Silent Generation)

मेरे से पहले की पीढ़ी - मूक पीढ़ी (The Silent Generation)
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मेरे माता-पिता 'मूक पीढ़ी' से थे। यह पीढ़ी उन लोगों से संबंधित है जिनका जन्म 1928 से 1945 के दौरान हुआ था। इस पीढ़ी के लोगों की आज की उम्र 81 से 98 वर्ष के बीच है। यद्यपि इस पीढ़ी के अनेक वरिष्ठ हमारे बीच से जा चुके हैं, फिर भी आज कई बुजुर्ग हमारे बीच मौजूद हैं। ये समाज के वे सबसे वरिष्ठ और अनुभवी स्तंभ हैं, जिन्होंने आधुनिक दुनिया की नींव रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। 

यह वह पीढ़ी है जिसका जन्म 'महान आर्थिक मंदी' (Great Depression) और 'द्वितीय विश्व युद्ध' के साये में हुआ था। जब ये बच्चे थे, तब दुनिया में जीवन यापन करना बेहद कठिन था।

इन्हें 'मूक' (Silent) कहे जाने के पीछे भी एक इतिहास है। इस नाम का इस्तेमाल सबसे पहले 1951 में 'Time' मैगजीन के एक लेख में किया गया था। दरअसल, इस पीढ़ी के माता-पिता व्यवस्था के खिलाफ काफी मुखर और विद्रोही स्वभाव के थे, परंतु उनके विपरीत इस पीढ़ी के युवाओं ने चुपचाप, बिना किसी बड़े विरोध के, कठिन परिस्थितियों में काम करना और व्यवस्था का सम्मान करना चुना। वे व्यवस्था से लड़ने के बजाय चुपचाप अपनी मेहनत से देश को दोबारा खड़ा करने में जुट गए।

इस पीढ़ी के लोगों की मुख्य विशेषताएँ यह रहीं कि ये बेहद वफादार, नियमों व अनुशासन का पालन करने वाले, और आर्थिक मामलों में बहुत मितव्ययी (Thrifty) थे। भारत के संदर्भ में, यह वही पीढ़ी है जिसने देश की आज़ादी के आंदोलन में भाग लिया और विभाजन का दंश अपनी आँखों से देखा और महसूस किया है।

सादर,
केशव राम सिंघल