शनिवार, 6 जून 2026

मेरे से पहले की पीढ़ी - मूक पीढ़ी (The Silent Generation)

मेरे से पहले की पीढ़ी - मूक पीढ़ी (The Silent Generation)
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मेरे माता-पिता 'मूक पीढ़ी' से थे। यह पीढ़ी उन लोगों से संबंधित है जिनका जन्म 1928 से 1945 के दौरान हुआ था। इस पीढ़ी के लोगों की आज की उम्र 81 से 98 वर्ष के बीच है। यद्यपि इस पीढ़ी के अनेक वरिष्ठ हमारे बीच से जा चुके हैं, फिर भी आज कई बुजुर्ग हमारे बीच मौजूद हैं। ये समाज के वे सबसे वरिष्ठ और अनुभवी स्तंभ हैं, जिन्होंने आधुनिक दुनिया की नींव रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। 

यह वह पीढ़ी है जिसका जन्म 'महान आर्थिक मंदी' (Great Depression) और 'द्वितीय विश्व युद्ध' के साये में हुआ था। जब ये बच्चे थे, तब दुनिया में जीवन यापन करना बेहद कठिन था।

इन्हें 'मूक' (Silent) कहे जाने के पीछे भी एक इतिहास है। इस नाम का इस्तेमाल सबसे पहले 1951 में 'Time' मैगजीन के एक लेख में किया गया था। दरअसल, इस पीढ़ी के माता-पिता व्यवस्था के खिलाफ काफी मुखर और विद्रोही स्वभाव के थे, परंतु उनके विपरीत इस पीढ़ी के युवाओं ने चुपचाप, बिना किसी बड़े विरोध के, कठिन परिस्थितियों में काम करना और व्यवस्था का सम्मान करना चुना। वे व्यवस्था से लड़ने के बजाय चुपचाप अपनी मेहनत से देश को दोबारा खड़ा करने में जुट गए।

इस पीढ़ी के लोगों की मुख्य विशेषताएँ यह रहीं कि ये बेहद वफादार, नियमों व अनुशासन का पालन करने वाले, और आर्थिक मामलों में बहुत मितव्ययी (Thrifty) थे। भारत के संदर्भ में, यह वही पीढ़ी है जिसने देश की आज़ादी के आंदोलन में भाग लिया और विभाजन का दंश अपनी आँखों से देखा और महसूस किया है।

सादर,
केशव राम सिंघल

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