कोरोना काल के संस्मरण
विषय-सूची (Index)
लेखक - केशव राम सिंघल
प्रस्तावना (Preface)
समर्पण
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 1 - अंश 1 से 10 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 1 - उलझन के साथ भ्रम की स्थिति
अंश 2 - स्पर्श खतरनाक
अंश 3 - नर्स की व्यथा
अंश 4 - मजदूर की व्यथा
अंश 5 - स्पर्श की मनाही
अंश 6 - देश की संसद मौन
अंश 7 - बहुत से सवाल
अंश 8 - सामूहिक शोक पर विराम
अंश 9 - मुश्किल वक्त में लोगों की मदद
अंश 10 - संवेदनाओं का अकाल
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 2 - अंश 11 से 20 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 11 - रोशनी के कण
अंश 12 - अस्तित्व का संकट और प्रकृति का पुनर्जन्म
अंश 13 - भरोसे का बिखराव
अंश 14 - हाशिए के बार श्रमिक
अंश 15 - अन्य बीमारियों के मरीज नियति के भरोसे
अंश 16 - आसमान में दिखा आसमान का नीला रंग (काव्य)
अंश 17 - राजनेताओं का एकाधिकारवादी रवैया
अंश 18 - कोई निश्चित इलाज नहीं
अंश 19 - शिक्षा का संकट
अंश 20 - बेरोजगारी
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 3 - अंश 21 से 30 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 21 - अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद
अंश 22 - चिंताजनक वैश्विक स्थिति
अंश 23 - बुजुर्ग
अंश 24 - बेटियों का दवाब
अंश 25 - प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत की खाई
अंश 26 - मानवता की मिसाल
अंश 27 - कोविड वैक्सीन (काव्य)
अंश 28 - प्रार्थना (काव्य)
अंश 29 - डर ही वायरस है (काव्य)
अंश 30 - कोरोना एक भीषण युद्ध (काव्य)
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 4 - अंश 31 से 40 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 31 - हे कोरोना (काव्य)
अंश 32 - मेरा माफीनामा (काव्य)
अंश 33 - कोरोना काल (काव्य)
अंश 34 - विडम्बना और त्रासदी
अंश 35 - कड़वा सत्य
अंश 36 - गरीबी भी महामारी
अंश 37 - मशवरों का अम्बार
अंश 38 - दुआ ही दवा (काव्य)
अंश 39 - अँधेरे में तीर
अंश 40 - एक समीक्षा
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 5 - अंश 41 से 50 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 41 - इतिहास की चेतावनी - 1918 की सीख
अंश 42 - नियमों की व्याख्या
अंश 43 - अनसुलझा प्रश्न
अंश 44 - बुनियादी शिक्षा
अंश 45 - श्रद्धांजलि
अंश 46 - परिवर्तन - शाश्वत सत्य (काव्य)
अंश 47 - सांसद की कोठी के बाहर (काव्य)
अंश 48 - कफनखसोटों का मुल्क
अंश 49 - वह देश का गरीब था (काव्य)
अंश 50 - भयावह कालखंड
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 6 - अंश 51 से 60 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 51 - दुःख भरी दास्ताँ
अंश 52 - सकारात्मक रहिए (काव्य)
अंश 53 - सुरक्षा ही समाधान (काव्य)
अंश 54 - सकारात्मकता और मानवता
अंश 55 - जीवन दर्शन
अंश 56 - बच्चों की शिक्षा
अंश 57 - क्या स्कूल भेजना सुरक्षित?
अंश 58 - अजमेर से विदा और जनता कर्फ्यू की आहट
अंश 59 - मन का वहम और 69 वर्ष का वह पड़ाव
अंश 60 - सन्नाटा, प्रकृति और 21 दिनों की लक्ष्मण रेखा
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 7 - अंश 61 से 70 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 61 - पैदल महाप्रयाण और व्यवस्था
अंश 62 - सृजन और 'भीलवाड़ा मॉडल'
अंश 63 - कैदी-जेलर द्वन्द और सेवाभाव को सलाम
अंश 64 - विचलित मन, विसंगतियाँ और 5 अप्रेल की रोशनी
अंश 65 - कृतज्ञता की दीये, घर की कैद और व्यवस्था का द्वन्द
अंश 66 - टोटकों का देश
अंश 67 - बेबसी और गुड्डी
अंश 68 - दुःखद समाचार और परिस्थितियों के बीच
अंश 69 - कन्टेनमेंट ज़ोन की घोषणा और अचानक यात्रा
अंश 70 - अजमेर की पुकार और गुड्डी की सेवा
कोरोना काल के संस्मरण - भाग 8 - अंश 71 से 74 (पढ़ने के लिए यहॉं क्लिक करें)
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अंश 71 - युग का अंत और गुड्डी की अंतिम यात्रा
अंश 72 - टीकाकरण की सुरक्षा और विदाई का अंतहीन सिलसिला
अंश 73 - इतिहास का आइना और भविष्य की सीख
अंश 74 - उपसंहार - स्मृतियों का पाथेय और एक नई सुबह - संकट में सृजन और समय का सदुपयोग
लेखक परिचय
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प्रस्तावना (Preface)
"कोरोना काल के संस्मरण - एक अंतर्यात्रा"
वर्ष 2020 की वह आहट, जिसने पूरी दुनिया की रफ्तार थाम दी थी, मेरे लिए केवल एक वैश्विक महामारी नहीं, बल्कि आत्म-मंथन और स्मृतियों को सहेजने का एक पड़ाव बन गई। आज जब मैं इन 74 अंशों की श्रृंखला को पाठकों के सम्मुख रख रहा हूँ, तो मन में संतोष और कृतज्ञता का मिला-जुला भाव है।
संस्मरण लिखना कितना कठिन कार्य है, इसका आभास मुझे तब हुआ जब मैंने कलम उठाई। डायरी के पन्नों में दर्ज नोट्स संक्षिप्त होते हैं, पर उन पन्नों के पीछे छिपी संवेदनाओं और विस्तार को शब्दों में ढालना एक बड़ी चुनौती थी। लिखते समय मैंने इस बात पर बहुत विचार किया कि अभिव्यक्ति की विधा क्या हो? अंततः मैंने तय किया कि जैसे-जैसे भाव मन में आएँगे, उन्हें वैसे ही कागज़ पर उतारूँगा। यही कारण है कि इस यात्रा में पाठकों को कभी गद्य मिलेगा, तो कभी पद्य।
इन संस्मरणों की विषयवस्तु केवल मेरी स्मृतियों तक सीमित नहीं है। इसमें मेरे स्वयं के लिखे नोट्स के साथ-साथ विभिन्न पुस्तकें, समाचार-पत्र, लेख, व्याख्यान और इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री का समावेश है। विशेष रूप से, आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विशेषकर 'गूगल जैमिनी' के साथ हुए निरंतर संवाद ने मुझे कई स्थानों पर मार्गदर्शन और जानकारी प्रदान की है। मैं इन सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोतों के प्रति हृदय से आभार प्रकट करता हूँ।
प्रस्तुत संस्मरणों में दिए गए आँकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और तत्कालीन सूचनाओं पर आधारित हैं, जो अनुमानित हो सकते हैं। अतः यदि कोई पाठक इस विषय पर अकादमिक शोध या गंभीर विश्लेषण करना चाहे, तो उन्हें अधिकृत एवं आधिकारिक सरकारी स्रोतों से प्रमाणित आँकड़े प्राप्त करने की सलाह दी जाती है। यह संस्मरण सांख्यिकीय दस्तावेज़ से अधिक एक मानवीय अनुभव का जीवंत चित्र है।
70 वर्ष की आयु के इस पड़ाव पर, 'अहमदाबाद के उस 10x10 के कमरे' से लेकर 'अजमेर की पुकार' तक का यह सफर मेरे जीवन का सबसे संतोषजनक अध्याय है। उम्मीद है कि ये संस्मरण यह बता पाने में सफल रहेंगे कि आपदा के उस घने अंधेरे और डर के माहौल में भी हमने अपनों के साथ और सृजन की मशाल के सहारे रास्ता ढूँढ ही लिया।
सादर,
केशव राम सिंघल
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समर्पण
यह संस्मरण श्रृंखला सादर समर्पित है—
मेरी प्रिय दिवंगत बहन 'गुड्डी' (सुधा) की पावन स्मृति को, जिनका शांत स्वभाव और कष्टों के बीच भी 'राम-राम' जपना मेरे लिए जीवन की सबसे बड़ी सीख बना। जिनके अंतिम पड़ाव में सेवा का अवसर मिलना मैं ईश्वर की विशेष कृपा मानता हूँ।
उन सभी 'कोरोना योद्धाओं' (चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पुलिस और सफाईकर्मियों) को, जिन्होंने स्वयं के प्राणों की परवाह किए बिना मानवता की मशाल को जलाए रखा। साथ ही मैं मेरी बेटियों, दामादों और पत्नी का, जिनकी देखरेख के कारण मैं कोरोना काल में टूटने से बचता रहा और पढ़ने-लिखने में व्यस्त रहा।
और उन अनगिनत दिवंगत आत्माओं को, जिन्होंने इस वैश्विक आपदा में हमसे विदा ली।यह लेखनी उन सभी के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है।
सादर,
केशव राम सिंघल
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